सैलाना के आदिवासी ग्रामीण अंचलों में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का उत्साह दिखा



ग्रामीण अंचलों के युवाओं के साथ बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा, नन्हे बच्चों का जुनून गांव की टापरी में भी किया योग
रतलाम- (कृष्णकांत मालवीय) 12 वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सैलाना क्षेत्र के आदिवासी ग्रामीण अंचलों में योग के प्रति उत्साह देखने को मिला। रविवार सुबह ग्रामीण क्षेत्रों की शुद्ध एवं ठंडी हवाओं के बीच युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों ने एकत्रित होकर योगाभ्यास किया तथा स्वस्थ जीवन का संदेश दिया। उधर गांव में एक ओर नजारा देखने को मिला। यह उत्साह गांव में मौजूद एक टापरी में नन्हे बच्चों द्वारा योग करते देखे गए।
क्षेत्र की विभिन्न ग्राम पंचायतों में आयोजित योग कार्यक्रमों में ग्रामीणजन बड़ी संख्या में शामिल हुए। योग दिवस के अवसर पर लोगों ने विभिन्न योगासन, प्राणायाम एवं ध्यान का अभ्यास कर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को समझा। ग्रामीणों ने बताया कि नियमित योग से शरीर स्वस्थ, तंदुरुस्त और मन शांत रहता है। इसी दौरान ग्राम पंचायत बल्लीखेड़ा के आमलियाडोल कलां में आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीणों ने सामूहिक योग किया। कार्यक्रम में सरपंच फुलजी मईड़ा, सचिव भरत तंवर, दिनेश मईड़ा, जीवणा निनामा, नानूराम मईड़ा, बदरू मईड़ा, ईश्वर निनामा, देवा भाभर, फनजी भाभर, कमलेश निनामा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत ओम् के उच्चारण के साथ हुई। इसके बाद प्रशिक्षकों एवं वरिष्ठ ग्रामीणों के मार्गदर्शन में प्रतिभागियों ने ताड़ासन, वृक्षासन, भुजंगासन सहित विभिन्न योग मुद्राओं का अभ्यास किया। साथ ही प्राणायाम और ध्यान के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों ने कहा कि योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जो व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाती है। ग्रामीण अंचलों में योग के प्रति बढ़ती जागरूकता समाज के लिए सकारात्मक संकेत है। कार्यक्रम के अंत में सभी ने नियमित योग करने तथा अपने परिवार और समाज को भी योग के प्रति प्रेरित करने का संकल्प लिया। नन्हे बच्चे गांव में स्थित एक पत्रे वाली टापरी में प्रशिक्षकों एवं वरिष्ठ ग्रामीणों के मार्ग दर्शन में सामूहिक योग अभ्यास करते नजर आए।




