अतिक्रमण मामले में हाईकोर्ट का अहम आदेश, चार सप्ताह में निर्णय लें तहसीलदार, तब तक बेदखली और तोड़फोड़ पर रोक

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अतिक्रमण मामले में हाईकोर्ट का अहम आदेश, चार सप्ताह में निर्णय लें तहसीलदार, तब तक बेदखली और तोड़फोड़ पर रोक

ब्यूरो रिपोर्ट एमपी की खबर रतलाम

रतलाम- (एमपी की खबर) जनविश्वास अभियान के तहत अतिक्रमण हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई का मामला अब मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय पहुंच गया है। कलेक्टर अजय कटेसरिया के निर्देशों के क्रम में तहसीलदार सैलाना द्वारा की गई कार्रवाई के विरुद्ध श्री रामविलासजी गुरु निर्मलरामजी एवं अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका प्रस्तुत की थी। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने तहसीलदार को प्रकरण में चार सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।

याचिकाकर्ताओं की ओर से प्रस्तुत याचिका में बताया गया कि सैलाना स्थित सर्वे नंबर 603 की 0.09 हेक्टेयर भूमि श्री रामद्वारा मंदिर से लगी हुई है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार उक्त भूमि पर दुकानें, स्कूल एवं अन्य निर्माण मौजूद हैं तथा भूमि पर उनका अधिकार 27 अक्टूबर 1965 की वसीयत के आधार पर है।

चार सप्ताह में निर्णय के निर्देश

हाईकोर्ट ने तहसीलदार सैलाना को निर्देशित किया है कि याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत जवाब एवं उपलब्ध अभिलेखों पर विचार करते हुए प्रकरण का कानून के अनुसार चार सप्ताह के भीतर निर्णय लिया जाए। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि तहसीलदार द्वारा अंतिम निर्णय लिए जाने तक याचिकाकर्ताओं की भूमि एवं वहां मौजूद निर्माणों के संबंध में किसी प्रकार की तोड़फोड़ या बेदखली की कार्रवाई नहीं की जाएगी।

निर्णय के खिलाफ अपील का अवसर

हाईकोर्ट के आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि तहसीलदार का निर्णय याचिकाकर्ताओं के विरुद्ध आता है, तो वे सक्षम न्यायालय अथवा प्राधिकारी के समक्ष अपील करने के लिए स्वतंत्र होंगे। ऐसी स्थिति में उन्हें अपील प्रस्तुत करने के लिए 10 दिन का समय दिया जाएगा। न्यायालय के निर्देशों के अनुसार अब तहसीलदार द्वारा निर्धारित अवधि में प्रकरण पर निर्णय लिया जाएगा। इसके बाद ही, आदेश की प्रकृति और आगे की कानूनी प्रक्रिया के अनुसार राजस्व विभाग द्वारा कार्रवाई की जा सकेगी।