जावरा में गायों की हड्डियों पर बवाल: CMO की टेबल से घंटाघर तक पहुंचा आक्रोश,जांच शुरू

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जावरा में गायों की हड्डियों पर बवाल: CMO की टेबल से घंटाघर तक पहुंचा आक्रोश,जांच शुरू

सीटी रिपोर्टर मोहित शर्मा, रतलाम

रतलाम- (Jaora) नगर पालिका के ट्रेंचिंग ग्राउंड के बाहर प्लास्टिक के कट्टों में गायों की हड्डियां दिखाई देने वाले वीडियो सामने आने के बाद बुधवार को जावरा में सुबह से शाम तक विरोध का माहौल बना रहा। मामला केवल नगर पालिका की टेबल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देखते ही देखते घंटाघर चौराहे तक पहुंच गया। हिंदू संगठनों ने नगर पालिका पहुंचकर जमकर विरोध जताया और कथित हड्डियों को CMO चन्द्रशेखर सोनिस की टेबल पर रखकर जवाब मांगा।

प्रदर्शनकारियों का सीधा सवाल था-

यदि यह ट्रेंचिंग ग्राउंड के आस-पास का मामला है, तो इतनी बड़ी लापरवाही हुई कैसे? मृत पशुओं की व्यवस्था किसकी जिम्मेदारी है और निगरानी व्यवस्था आखिर कहां थी?

नगर पालिका में चर्चा और कार्रवाई के आश्वासन के बावजूद प्रदर्शनकारी संतुष्ट नहीं हुए। इसके बाद मामला औद्योगिक क्षेत्र पुलिस थाने तक पहुंचा। वहां प्रकरण दर्ज कराने की मांग की गई। बाद में संगठन के सदस्य पुनः नगर पालिका पहुंचे और CMO चेम्बर के बाहर धरने पर बैठ गए। जब यहां भी बात नहीं बनी तो प्रदर्शनकारी शहर के प्रमुख घंटाघर चौराहे पर पहुंच गए। बीच चौराहे पर धरना शुरू होने से यातायात प्रभावित हुआ और बाजार में जाम की स्थिति बन गई। पुलिस प्रशासन को मौके पर पहुंचकर हस्तक्षेप करना पड़ा।

CMO की टेबल पर कंकाल रखकर पूछा-जवाब कौन देगा?

प्रदर्शन के दौरान संगठन के सदस्यों ने कथित पशु कंकाल नगर पालिका CMO की टेबल पर रखकर अपना आक्रोश जताया। संगठन ने वीडियो दिखाते हुए निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की। मामला इसलिए भी गंभीर हो गया क्योंकि वीडियो में प्लास्टिक के कट्टों में हड्डियां दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। अब असली सवाल यह है कि ये हड्डियां किसकी हैं, वहां तक कैसे पहुंचीं और यदि वे मृत पशुओं की हैं तो उनके निस्तारण की जिम्मेदारी किसकी थी?

CMO बोले-वीडियो ट्रेंचिंग ग्राउंड के बाहर का, फिर भी जांच शुरू

नगर पालिका CMO चन्द्रशेखर सोनिस ने बताया कि हिंदू संगठनों के लोगों ने उन्हें कुछ वीडियो दिखाए हैं, जिनमें प्लास्टिक के कट्टों में हड्डियां दिखाई दे रही हैं। उनके अनुसार वीडियो में दिखाई दे रही हड्डियां नगर पालिका के ट्रेंचिंग ग्राउंड के बाहर नजर आ रही हैं और किसी व्यक्ति का चेहरा स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहा है। CMO के मुताबिक शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं और नगर पालिका स्तर पर आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है। साथ ही अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ औद्योगिक क्षेत्र पुलिस थाने में प्रकरण दर्ज होने की जानकारी दी गई है। उन्होंने कहा कि ट्रेंचिंग ग्राउंड पर गुरुवार से CCTV कैमरे दोबारा चालू किए जाएंगे। इसके अलावा चौकीदार की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।

CCTV बंद था तो निगरानी कौन कर रहा था?

यही बिंदु अब पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल बनकर सामने आया है। यदि ट्रेंचिंग ग्राउंड जैसे संवेदनशील स्थान पर CCTV कैमरे बंद थे, तो वहां आने-जाने वाली गतिविधियों पर नजर किसकी थी? नगर पालिका अब CCTV बहाल करने और चौकीदार तैनात करने की बात कह रही है, लेकिन सवाल यह है कि यह व्यवस्था पहले क्यों नहीं थी? जांच में यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि CCTV कब से बंद थे, किसकी जानकारी में बंद थे और उनकी निगरानी की जिम्मेदारी किस अधिकारी या कर्मचारी की थी।

मृत पशुओं की जिम्मेदारी भी तय करेगी नगर पालिका

CMO ने स्पष्ट किया कि नगर पालिका अब केवल आवारा पशुओं को उठाएगी। यदि किसी गौशाला में पशु की मृत्यु होती है तो उसके शव के निस्तारण की जिम्मेदारी संबंधित गौशाला की होगी। इसी प्रकार निजी पशु की मृत्यु होने पर संबंधित पशुपालक जिम्मेदार रहेगा। यह व्यवस्था सामने आने के बाद अब यह भी देखना होगा कि पूर्व में मृत पशुओं के निस्तारण की व्यवस्था किस तरह और किसकी निगरानी में की जाती रही है।

घंटाघर पर धरना, बाजार में जाम और पुलिस की एंट्री

नगर पालिका से शुरू हुआ विरोध जब घंटाघर पहुंचा तो मामला सड़क पर आ गया। प्रदर्शनकारियों ने बीच चौराहे पर धरना देकर नारेबाजी की। इससे बाजार का यातायात प्रभावित हुआ और जाम की स्थिति बन गई। सूचना पर शहर थाना प्रभारी दीपक मंडलोई और सीएसपी युवराज सिंह चौहान मौके पर पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से चर्चा की और मामले में विधिवत जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया। थाना प्रभारी दीपक मंडलोई ने बताया कि घंटाघर क्षेत्र शहर पुलिस थाने के अंतर्गत आता है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया गया, जिसके बाद शाम करीब 5 बजे धरना समाप्त कर दिया गया।

अब असली परीक्षा जांच की-सिर्फ कैमरे और चौकीदार से नहीं चलेगा काम

सुबह से शुरू हुआ विरोध शाम तक कई चरणों में चलता रहा। अब प्रशासन और नगर पालिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल माहौल शांत करना नहीं, बल्कि मामले की तह तक पहुंचना है।

हड्डियां वास्तव में किस पशु की हैं?

उन्हें वहां कौन लेकर आया?

वीडियो कब और कहां बनाया गया?

CCTV कब से बंद था?

मृत पशुओं के निस्तारण की पुरानी व्यवस्था क्या थी?

और इस पूरे मामले में किसी की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

इन सवालों के जवाब जांच से ही सामने आएंगे।

फिलहाल नगर पालिका ने आंतरिक जांच शुरू कर दी है और पुलिस स्तर पर भी कार्रवाई की बात कही गई है। CCTV कैमरे दोबारा चालू करने और चौकीदार की व्यवस्था का निर्णय भी लिया गया है। लेकिन अब निगाह इस बात पर रहेगी कि जांच केवल कागजों तक सीमित रहती है या वास्तव में जिम्मेदार व्यक्ति तक पहुंचती है। क्योंकि मामला सिर्फ कुछ हड्डियों का नहीं, बल्कि नगर की व्यवस्था, पशु निस्तारण प्रणाली और जिम्मेदारी तय करने की प्रशासनिक क्षमता पर उठे सवालों का है।