पिता दिवस पर विशेष: पिता की प्रेरणा से शिक्षा और समाज सेवा में रचा नवाचारों का इतिहास
ब्यूरो रिपोर्ट mpkikhabar रतलाम
रतलाम- (sailana) पिता केवल परिवार का मुखिया नहीं होता, बल्कि वह जीवन का पहला शिक्षक, मार्ग दर्शक और प्रेरणास्रोत भी होता है। इसी भावना को चरितार्थ करते हैं शिक्षा जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले देवेंद्र वाघेला, जिन्होंने अपने पिता कैलाश चंद्र वाघेला से मिली सीख, संस्कार और प्रेरणा को जीवन का आधार बनाकर शिक्षा एवं समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं।
देवेंद्र वाघेला बताते हैं कि बचपन से ही उनका अपने पिता के साथ विशेष लगाव रहा है। वे जहां भी जाते, पिता के साथ ही रहते थे। उनके साथ घूमना, भोजन करना और हर सुख-दुख में सहभागी बनना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। पिता के प्रति यही प्रेम और सम्मान आगे चलकर उनके व्यक्तित्व निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति बना। उन्होंने कहा कि जब उन्हें शिक्षक की नौकरी मिली, तब भी लगभग 15 वर्षों तक पिता के साथ एक ही स्थान पर कार्य करने का अवसर मिला। इस दौरान उन्होंने अपने पिता की मेहनत, लगन, अनुशासन और कार्य के प्रति समर्पण को बहुत करीब से देखा। पिता के कार्य करने की शैली ने उन्हें भी शिक्षा के क्षेत्र में कुछ नया और बेहतर करने की प्रेरणा दी।
देवेंद्र वाघेला के पिता कैलाश चंद्र वाघेला दौलतपुरा में उच्च श्रेणी शिक्षक के पद पर कार्यरत रहे और वर्ष 2011 में सेवानिवृत्त हुए। उनके मार्गदर्शन और आशीर्वाद से प्रेरित होकर देवेंद्र वाघेला ने शिक्षा क्षेत्र में लगातार नवाचार किए और अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त किए। वर्ष 2013 में उनका पदोन्नति होकर घोड़ा पल्ला में पदस्थापन हुआ, जहां उन्होंने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए कई अभिनव पहल की। शिक्षा के साथ-साथ उन्होंने सामाजिक सरोकारों को भी अपनी कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया। विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से विद्यार्थियों के लिए फर्नीचर वितरण, स्कूल बैग वितरण, गणवेश वितरण, स्वेटर वितरण जैसे अनेक जनहितकारी कार्य किए। उनका मानना है कि शिक्षा केवल कक्षा तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों की आवश्यकताओं और सुविधाओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
वर्तमान में कन्या संकुल शिवगढ़ में कार्यरत देवेंद्र वाघेला को जब सह- समन्वयक साक्षरता का दायित्व मिला, तब उन्होंने इस क्षेत्र में भी नवाचारों के माध्यम से साक्षरता अभियान को नई दिशा देने का प्रयास किया। उनके नेतृत्व में शिक्षा और साक्षरता संबंधी गतिविधियों को प्रभावी रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है। देवेंद्र वाघेला कहते हैं कि आज भी उनके पिता का मार्गदर्शन उन्हें निरंतर मिलता है। हर महत्वपूर्ण निर्णय में पिता की सलाह और अनुभव उनके लिए अमूल्य साबित होते हैं। वे मानते हैं कि “पिता शक्ति हैं, पिता प्रेरणा हैं, पिता मार्गदर्शन हैं। पिता के बताए रास्ते पर चलकर ही जीवन में सफलता और तरक्की प्राप्त की जा सकती है।
पारिवारिक जीवन की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि उनका बड़ा पुत्र जय वाघेला बेंगलुरु में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत है, जबकि दूसरा पुत्र इंदौर में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहा है। उनके अनुसार किसी भी पिता के लिए इससे बड़ी खुशी और गर्व की बात नहीं हो सकती कि उसके बच्चे जीवन में आगे बढ़कर अपने सपनों को साकार कर रहे हों। पिता दिवस के अवसर पर देवेंद्र वाघेला ने सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पिता का सम्मान, उनका आशीर्वाद और उनके अनुभव जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं। जो व्यक्ति अपने पिता की सीख और संस्कारों को अपनाता है, वह निश्चित रूप से सफलता की नई ऊंचाइयों तक पहुंचता है। उन्होंने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि पिता दिवस केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि पिता के त्याग, संघर्ष और प्रेम के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है।




