रक्षाबंधन विशेष: बाहरी धागा नहीं, आंतरिक चेतना से जुड़ने का पर्व
रतलाम- (एमपी की खबर) रक्षाबंधन को आमतौर पर भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे की रक्षा के संकल्प के पर्व के रूप में मनाया जाता है। लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से यह पर्व केवल कलाई पर धागा बांधने तक सीमित नहीं है। गुरु MAAsterG के अनुसार रक्षाबंधन का वास्तविक अर्थ अपनी आंतरिक चेतना को परम रक्षक से जोड़ना है।
उनका कहना है कि कलाई पर बंधा धागा कुछ समय बाद खुल सकता है, लेकिन इस पर्व का संदेश उस आंतरिक बंधन को समझना है, जो व्यक्ति को अपने भीतर की चेतना से जोड़ता है। यदि मनुष्य केवल बाहरी बंधन निभाए और भीतर से चेतना से न जुड़े, तो रक्षाबंधन का वास्तविक उद्देश्य अधूरा रह जाता है। गुरु MAAsterG के विचार के अनुसार मनुष्य के जीवन में कामवासना, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसे पांच विकार ऐसे बंधन हैं, जो उसे भीतर से बांधे रखते हैं। सच्ची रक्षा इन विकारों से मुक्ति पाने और अपनी चेतना को जागृत करने में है।
रक्षाबंधन के आध्यात्मिक पक्ष को समझाते हुए श्रीकृष्ण और द्रौपदी के प्रसंग का भी उल्लेख किया जाता है। संदेश यह है कि वास्तविक रक्षक केवल बाहरी परिस्थितियों में रक्षा करने वाला नहीं, बल्कि वह शक्ति है जो मनुष्य की आंतरिक चेतना और जीवन को सही दिशा प्रदान करे। गुरु MAAsterG का संदेश है कि संसार के रिश्तों और जिम्मेदारियों को निभाते हुए मनुष्य को अपने भीतर उस परम चेतना से संबंध स्थापित करना चाहिए, जो हर परिस्थिति में उसका सच्चा सहारा बन सके।
इस रक्षाबंधन का संदेश यही है-कलाई पर राखी बांधने के साथ अपने भीतर भी एक संकल्प बांधें। बाहरी रिश्तों को प्रेम से निभाएं और अपनी आंतरिक चेतना को परम रक्षक से जोड़ने का प्रयास करें।
गुरु MAAsterG के आध्यात्मिक विचार
MAAsterG के आध्यात्मिक विचार और जीवन से जुड़े संदेश उनके यूट्यूब चैनल ‘MAAsterG’ और ‘GOD HOME JOURNEY’ पर उपलब्ध हैं।




