रतलाम में गरबा कर फुटकर हाथ ठेला व्यापारियों ने किया अनूठा विरोध प्रदर्शन

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रतलाम में गरबा कर फुटकर हाथ ठेला व्यापारियों ने किया अनूठा विरोध प्रदर्शन

प्रतिदिन 50 रूपए वसूली के आदेश का व्यापारियों ने किया विरोध, आदेश बदलने तक अपनाएंगे गांधीगिरी का तरीका

रतलाम- (Ratlam) नगर निगम में फुटकर हाथ ठेला व्यापारियों ने अनूठा विरोध प्रदर्शन किया है। व्यापारियों ने गरबा करके प्रतिदिन 50 रूपए वसूली के आदेश का विरोध जताया है। ओर आदेश बदलने तक गांधीगिरी कर विरोध प्रदर्शन करने को कहा है।

बुधवार को रतलाम नगर निगम में हाथ ठेला व्यापारियों ने गजब की गांधीगिरी की है। ये लोग प्रतिदिन 50 रूपए की वसूली के आदेश का विरोध करने नगर निगम पहुंचे थे। इसी दौरान इन छोटे व्यापारियों ने देशभक्ति के गानों पर नृत्य किया और गरबा करके नगर निगम के फैसले का विरोध जताया है। इन छोटे व्यापारियों का कहना है कि उनकी आमदनी इतनी ज्यादा नहीं है। की जितना नगर निगम उनसे वसूल करेगी। व्यापारी हाथ थेला गाड़ी लेकर ओर हाथों में फूल फ्रूट लेकर नाचते झूमते देश भक्ति गीतों पर गरबा करते यहां पहुंचे थे और आक्रोशित लोगों ने केले हाथ में लेकर रतलाम नगर निगम में विरोध किया है। वही विरोध की सूचना पर रतलाम महापौर भी व्यापारियों से मिलने पहुंचे और उन्हें मदद का पूरा आश्वासन दिया है। जिसके बाद इन हाथ ठेला व्यापारियों ने अपना विरोध प्रदर्शन खत्म किया है।

गुमठी व्यापारी सुभाष निनामा व ठेला व्यापारी विक्रम भोई ने बताया की हम फल और सब्जी बेचने का काम करते हैं। नगर निगम ने हम गरीब व्यापारीयों से जो 50-100 रूपए का शुल्क लगाया है। वो बहुत ज्यादा है। क्यों की हमारे घरों में 100 रूपये व 50 रूपए में 4 किलो आटा आता है। उस आटे को हम चार दिनों तक चलाते हैं। हम गरीब वर्ग के लोग इतना शुल्क नहीं दे सकते है। हम यहां पर किसी भी प्रकार का कोई भी धरना प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं। हम तो सिर्फ गांधीगिरी करने आए हैं। और रतलाम महापौर को तब तक मनाएंगे। जब तक वह मान नहीं जाए। अधिकारी हमसे शुल्क लेने आएंगे तो हम उनसे किसी भी प्रकार का कोई भी विवाद नहीं करेंगे। हम सिर्फ गांधीगिरी करेंगे। देशभक्ति के गीत गाएंगे। हम हमारे नेताओं को प्रेम से मनाएंगे।

रतलाम महापौर प्रहलाद पटेल ने कहा कि फल फ्रूट व सब्जी की ठेला गाड़ी फुटपाथ पर लगाते हैं। हमने बीते 3 सालों से इन के ऊपर किसी भी तरह का कर राशि लागू नहीं किया था। लेकिन हमें इन का मजबूरन जो परडे के हिसाब से शुल्क पहले लिया जाता था। वो परिषद में लागू करके सब्जी वालो कि 30 रूपए व फ्रूट वालों का 50 रूपए शुरू किया था। व्यापारियों का कहना था की इस में थोड़ी राहत दि जाए। पैसा ज्यादा है। व्यापारियों की बात सुनी है। और आज निर्णय लिया जाएगा की। क्या अच्छा हो सकता है।

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