तीन दिवसीय नानीबाई का मायरा का हुआ समापन

रतलाम- (Ratlam) जिले के सैलाना नगर के महालक्ष्मी गली स्थित माता रानी शीतला भवानी मंदिर निर्माण वर्षगांठ पर शनिवार रात शीतला माता मंदिर उत्सव समिति महिला मंडल की ओर से आयोजित तीन दिवसीय नानी बाई रो मायरो का समापन हुआ। इस अवसर पर कथा सुनने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।
कथा वाचक ललीत शास्त्री सांगाखेड़ा वाले ने कहा कि यह कथा गौमाता, माता पिता, सास ससुर, बड़े बुजुर्गो की सेवा, सहयोग और समर्पण की सीख देती है। कथा में सहयोग की भावना होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म को जीवित रखना है तो हमें एकजुटता से मिलकर ऐसे धार्मिक आयोजन करना जरूरी है। नरसी मेहता में भगवान के प्रति समर्पण की भावना थी।
कथावाचक ने नरसी मेहता और श्रीकृष्ण के बीच हुए रोचक संवाद को बहुत ही प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि घर में कितनी भी बहु हों, कोई अपने पीहर से कितना भी लाए, मगर ससुराल के लोगों को कभी भी धन के लिए किसी को प्रताड़ित नहीं करना चाहिए। क्योकि हर किसी की आर्थिक स्थिति एक जैसी नहीं होती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी बहन के भाई नहीं हो या परिवार गरीब हो तो उसका सहयोग करना चाहिए।
पंडित ललित शास्त्री ने बताया कि भक्त नरसी ने महादेव को भक्ति से प्रकट किया और वरदान में धन दौलत की जगह राधा-कृष्ण मांगे। सच्चे भक्त को धन दौलत से मोह नहीं होता। नरसी के पास धन दौलत थी तो भाई बंद व सभी सगे सब इज्जत करते थे। यही संसार का नियम है। नरसी जी के पास कुछ नहीं रहा तो उनके भाई बंद भी मुंह मोड़ गए और मायरे के लिए साथ जाने से भी मना कर दिया। लेकिन नरसी जी को अपने इष्ट पर भरोसा है, यह कथा भक्त और भगवान के मध्य अटूट विश्वास की कथा है। कथा के दौरान नरसी भक्त की पुकार सुनकर मामेरा के लिए आए भगवान की झांकी भी बनाई गई।
नानी बाई को मायरो कार्यक्रम के अंतिम दिन भगवान श्रीकृष्ण ने छप्पन करोड़ का मायरा भरा। नरसी भक्त ने भी कड़ी तपस्या कर भगवान को याद किया, उनको आना पड़ा और श्रीकृष्ण ने छप्पन करोड़ का मायरा भी भरा। भगवान श्रीकृष्ण के परम भक्त नरसी मेहता ने जब अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया तब उन्हें भगवान का साक्षात्कार हुआ।समापन पर शीतला माता मंदिर पर हवन किया गया। व यहां से शुरू एक धार्मिक चल समारोह व नानी बाई के मायरा पूरे नगर में भ्रमण कर कथा स्थल पहुंचा।
इस अवसर पर समिति द्वारा पंडित ललित शास्त्री और कलाकारों का सम्मान किया। वहीं तीन दिवसीय नानी बाई का मायरा के प्रचार-प्रसार पर पत्रकार नितेश राठौड़, कृष्णकांत मालवीय का भी समिति द्वारा सम्मान किया गया।




