जिला स्तरीय संवेदीकरण सह अभिमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया

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जिला स्तरीय संवेदी करण सह अभिमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया

रतलाम- (Ratlam) राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग बाल अधिकारों और अन्य संबंधित मामलों की रक्षा के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के परीक्षा पर चर्चा से प्रेरित होकर एनसीपीसीआर बच्चों के साथ प्रतिवर्ष परीक्षा पर्व मनाता है। इसी क्रम में रतलाम जिला कलेक्टर राजेश बाथम के निर्देशन में परीक्षा पर्व अभियान के तहत जिला स्तरीय संवेदीकरण सह अभिमुखीकरण कार्यक्रम मंगलवार को शा.उ.मा.वि. क्र. 1 में आयोजित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला शिक्षा अधिकारी अनीता सागर ने की। इस अवसर पर डा. माणिक डांगे, व्याख्याता डाईट पिपलौदा राजेन्द्र भोगलेकर, डीवीसी योगेश पाल, प्राचार्य सी.एम. राईज सैलाना गिरीश सारस्वत आदि मुख्य वक्ता के रुप में उपस्थित थे।

एनसीपीसीआर के अभिषेक यादव ने कार्यक्रम की रुप रेखा बताई। अतिथियों का स्वागत अनीता सागर, एडीपीसी अशोक लोढा, जिला योजना अधिकारी जितेन्द्र जोशी एवं नीरु वर्मा ने किया। राजेन्द्र भोग लेकर ने कहा कि किसी भी विद्यार्थी को अण्डर स्टिमेट या ओवर स्टिमेट न करें। पढें तो 10 प्रतिशत, सुने तो 20 प्रतिशत, लिखे तो 30 प्रतिशत, चर्चा करें तो 70 प्रति तथा सभी साथ हो तो 100 प्रतिशत शिक्षा प्राप्त कर सफल हुआ जा सकता है। आपने कहा कि एनईपी 2020 के रोड मेप में एवं क्यूरिकूलम में नेशनल स्किल क्वालि फिकेशन फ्रेमवर्क इन्वाल्वड है। ताकि बच्चा 21 वीं शताब्दी के काम्पिटिटिव वर्ल्ड में स्टेंड कर सके।

डा. माणिक डांगे ने कहा कि बच्चों के अन्दर स्ट्रेस डेवलप न किया जाए। एग्जाम को स्ट्रेस फेक्टर न बनाते हुए उसे पर्व बनाना है। थोडा सा तनाव काम करने के लिए प्रेरित करता है। मेडिटेशन द्वारा प्रत्येक व्यक्ति तनाव मुक्त हो सकता है। सोशल मीडिया संक्रामक रोग है। इससे विद्यार्थियों को बचना चाहिए। परीक्षा परिणाम के प्रति गंभीर तो होना चाहिए पर बच्चे पर दबाव नहीं डालना है। योगेश पाल ने कहा कि शिक्षक ही बच्चों के समग्र विकास और उन्नति के लिए एक की एलिमेंट है। सभी को चाहिए कि विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षा का डर न बताएं, परीक्षा की गंभीरता बताएं एवं उन्हें तुलनात्मक अंक लाने, श्रेणी लाने के लिए बार-बार न कहते रहें। शिक्षक एवं पालक परीक्षा आते ही बच्चों को परीक्षा को एक पर्व एवं त्यौहार के समान उत्सव मनाने के लिए प्रेरित करें। गिरीश सारस्वत ने कहा कि पालकों को अपने बच्चों के लिए समय निकालना चाहिए, पालक को अपने बच्चों का दोस्त बनना होगा। बच्चों मे टैलेंट हमें ढूंढना है। कार्यक्रम का संचालन आशीष दशोत्तर ने किया।

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