विधानसभा सत्र में अवैध शराब की बिक्री पर उठे सवाल
सैलाना विधानसभा में अवैध शराब बिक्री को लेकर उठा बड़ा सवाल, विधायक कमलेश्वर डोडियार ने सरकार को घेरा- उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने दिया जवाब
भोपाल/रतलाम- (Bhopal, Ratlam) मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में सैलाना विधानसभा क्षेत्र की एक प्रमुख सामाजिक समस्या अवैध शराब बिक्री को लेकर जोरदार बहस देखने को मिला है। भारतीय आदिवासी पार्टी के विधायक कमलेश्वर डोडियार ने यह मुद्दा सदन में उठाया और सरकार से तीखे सवाल पूछे। विधायक डोडियार ने क्षेत्र में अवैध शराब के प्रसार, डायरी सिस्टम और शराब की मोटर साइकिल से हो रही आपूर्ति को लेकर सवालों की झड़ी लगा दी। इन सवालों का जवाब प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं वाणिज्यिक कर मंत्री जगदीश देवड़ा ने दिया।
विधायक डोडियार ने पुछे सवाल-
नवंबर 2024 से अब तक सैलाना क्षेत्र में कितने अवैध शराब के केस दर्ज हुए? कितनी शराब जब्त हुई?
जब्त शराब का बेंच नंबर क्या था, और किन ठेकेदारों को यह शराब आवंटित थी?
डायरी सिस्टम के माध्यम से गांवों में हो रही शराब बिक्री को लेकर शासन को लिखे गए पत्रों पर क्या कार्रवाई हुई?
क्या दोषी ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की गई?
मोटर साइकिल से हो रही शराब सप्लाई पर क्या कदम उठाए गए हैं?
क्या ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे?
उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने दिए जवाब-
1 नवंबर 2024 से अब तक सैलाना क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री के 63 केस दर्ज हुए हैं। शराब जब्ती और अन्य आंकड़े परिशिष्ट-1 में संलग्न हैं।
जब्त शराब का बेंच नंबर और ठेकेदार जानकारी परिशिष्ट-2 में है, लेकिन नाम सार्वजनिक नहीं किए गए।
कार्रवाई मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 की धाराओं 34, 36, और 49 (क) के तहत की जाती है।
विधायक द्वारा भेजे गए तीन पत्रों पर विभाग ने कार्रवाई की और पत्रों के जवाब भेजे। उनकी प्रतिलिपियां परिशिष्ट-3 में रखी गई हैं।
जवाब में स्पष्ट किया गया कि साक्ष्य की कमी के चलते किसी ठेकेदार पर कार्रवाई नहीं हो सकी।
इस अहम सवाल पर उपमुख्यमंत्री ने कोई ठोस जानकारी नहीं दी, जिससे यह सवाल अनुत्तरित ही रह गया।
63 प्रकरण दर्ज होना प्रशासनिक सक्रियता दर्शाता है, लेकिन ठेकेदारों की भूमिका पर चुप्पी और कार्रवाई न होना गंभीर सवाल खड़े करता है।
डायरी सिस्टम स्थानीय स्तर पर अवैध शराब के संगठित तंत्र का प्रतीक बन चुका है। इसमें ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका है, लेकिन सरकार ने इसे मानने से परहेज किया।
क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही शराब की मोटर साइकिल से डिलीवरी पर सरकार की चुप्पी चिंताजनक है। यह तरीका कानून की पकड़ से बचकर बिक्री का साधन बन चुका है।
परिशिष्ट में रखी गई जानकारी आम जनता के लिए सुलभ नहीं है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।
सैलाना जो आदिवासी बहुल क्षेत्र है, वहां अवैध शराब की बिक्री ने सामाजिक ताना-बाना को कमजोर किया है। युवाओं पर इसका गहरा असर पड़ा है।
विधायक डोडियार लंबे समय से इस विषय को उठाते रहे हैं और प्रशासन पर निष्क्रियता का आरोप लगाते रहे हैं- दिसंबर 2024 में कलेक्टर के खिलाफ की गई उनकी टिप्पणी भी इसी पृष्ठभूमि से जुड़ी है।
अवैध शराब की बिक्री को लेकर विधायक कमलेश्वर डोडियार ने जो सवाल उठाए, वे न केवल सैलाना बल्कि पूरे प्रदेश के लिए चेतावनी हैं।
उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के जवाबों में कुछ आँकड़े और कार्रवाइयाँ जरूर दिखाई गईं, लेकिन प्रभावी नीति, जवाबदेही और पारदर्शिता की कमी साफ झलकती है।
सरकार को चाहिए कि साक्ष्य इकट्ठा करने की दिशा में सुधार करे, डायरी सिस्टम और मोटरसाइकिल नेटवर्क को तोड़ने के लिए विशेष रणनीति बनाए, और दोषी ठेकेदारों एवं अधिकारियों को बख्शे नहीं। यह मुद्दा अब सिर्फ सदन का नहीं, सैलाना के आमजन का है और इसकी गूंज लंबे समय तक बनी रहेगी।




