संगीत की सुर लहरियों से महक रहा गुलाब चक्कर

रतलाम- (Ratlam) संगीत की स्वर लहरिया मालव माटी के केंद्र रतलाम के गुलाब चक्कर को अपनी संगीत मई महक से सराबोर कर रही है। स्वास्थ्य विभाग जिला रतलाम और जिला चिकित्सालय के चिकित्सक तथा स्टाफ ने अपनी संगीत में ही प्रस्तुतियां देकर श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ समाजसेवी गोविंद काकानी, सीएमएचओ डॉक्टर संध्या बेलसरे, सिविल सर्जन डॉक्टर एमएस सागर, डॉ.एपी सिंह, डॉ.गोपाल यादव, डॉ. महेश मौर्य, डॉ.अभिषेक अरोरा, आशीष चौरसिया आदि की उपस्थिति में किया गया।
कलेक्टर राजेश बाथम के मार्ग दर्शन में गुलाब चक्कर ने नया स्वरूप लिया है। गुलाब चक्कर की रोशनी की आभा में कला, संस्कृति को अभिव्यक्त करने के नए अवसर मिल रहे हैं। रंगीला रे, एक दिन बिक जाएगा माटी के मोल, संभाला है। मैंने बहुत अपने दिल को, इतना तो याद है, मुझे आदि गीतों पर आधारित स्वर सम्राट लता मंगेशकर, किशोर कुमार, कुमार शानू, मो. रफी के गीतों की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को आनंदित कर दिया। पूरे कार्यक्रम के दौरान तालिया गूंजती रही। कलावादी फ्रेडरिक चोपिन ने कहा है, संगीत आत्मा की कविता है। रतलाम के साहित्यकार आशीष दाशोत्तर लिखते हैं कि संगीत मन की ही नहीं तन की भी पीड़ा हरता है। संगीत चिकित्सा को राग़ चिकित्सा भी कहा जाता है। संगीत चिकित्सा मानसिक अवसाद , तनाव, चिंता और अन्य मानसिक समस्याओं को कम करने में भी मदद करती है।
रंगारंग कार्यक्रम के दौरान डॉ. महेश मौर्या , डॉ गोपाल यादव, दो अखंड प्रताप सिंह, विपिन शर्मा, अनिल परिहार, देवेंद्र तोमर, भरत लिंबोदीया, सुनील धीनदौर, कैलाश यादव, ज्योति चौधरी, सुदर्शन सिंह, रमेश सोलंकी, विजय सोनी, राकेश बोरिया आदि ने प्रस्तुति देकर समा बांध दिया। वही कार्यक्रम के दौरान डॉ दीप व्यास, सुधीर बेलसरे जिला मलेरिया अधिकारी डॉ प्रमोद प्रजापति, एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ गौरव बोरीवाल, नवीन नागर, विनोद गहलोत, शीला चौहान, शरद शुक्ला, दीपक उपाध्याय सहित बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन राकेश बोरिया ने किया तथा डॉ अभिषेक अरोरा ने आभार माना।




