महाशिवरात्रि पर दोनों के केदारेश्वर महादेव मंदिर सहित नगर के विभिन्न शिव मंदिरों में दिखा श्रद्धालुओं का हुजूम

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महाशिवरात्रि पर दोनों के केदारेश्वर महादेव मंदिर सहित नगर के विभिन्न शिव मंदिरों में दिखा श्रद्धालुओं का हुजूम

26/Feb/2025

महाशिवरात्रि पर स्पेशल खबर- कृष्णकांत मालवीय

ब्यूरो रिपोर्ट mpkikhabar रतलाम 

रतलाम (Ratlam,mp)- पूरे प्रदेशभर में महाशिवरात्रि का पर्व बड़े ही हर्ष उल्लास के साथ मनाया जा रहा है।
श्रद्धालुओं ने महादेव के दर्शन किए और उनका जलाभिषेक कर विधि- विधान के साथ पूजा-अर्चना की। श्रृद्धालु डीजे की धुनो पर थिरकते हुए भी नजर आए। श्रृद्धालुओं को फरीयाल प्रसादी का भी वितरण किया गया‌।

बुधवार को महाशिवरात्रि पर नगर से पांच किलोमीटर दूर स्थित अडवानीया के समीप बड़े केदारेश्वर महादेव मंदिर तथा सरवन रोड स्थित कल्याण केदारेश्वर महादेव पर सुबह से ही शिव भक्तों का आने जाने का सिलसिला शुरू हो गया था। दिन भर भक्तो की भारी भिड देखी गयी। यहां कुंड में स्नान करने के बाद भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। यहा पर रतलाम, धामनोद डेलनपूर, करिया, आम्बा, पिपलोदा,जावरा सरवन शिवगढ सहित कई गांवो से लोग दर्शन करने के लिए आए। साथ ही महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर केदारश्वर में पोस्ट आफिस द्वारा गंगा जल वितरण का केम्प आयोजित किया। पोस्ट मास्टर आरसी बसैर ने बताया की 200 मिलीमीटर गंगाजल तीस रूपये में उपलब्ध है।

निलकठेश्वर महादेव मंदिर पर श्रद्धालुओं की रही भीड़-

नगर के बांसवाडा रोड स्थित अति प्राचीन निलकंठेश्वर महादेव मंदिर में शिव भक्तो ने विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। मंगलवार रात को भगवान भोलेनाथ को श्रद्धालुओं ने जल, दूध, और फूल चढ़ाए और उनकी आराधना की। शाम को भगवान भोलेनाथ की पूजा-पाठ कर भक्तो को प्रसादी वितरण की। इधर महाशिवरात्रि के अवसर पर लोगों ने अपने घरों में भी शिव पूजा की और व्रत रखा। लोगों ने महादेव की कृपा के लिए प्रार्थना की और उनके आशीर्वाद की कामना की। साथ ही सायंकाल को निलकंठेश्वर महादेव मंदिर से पालकी में सवार बैठाकर भगवान भोलेनाथ जी को नगर भ्रमण करवाया गया। नगर भ्रमण के दौरान विभिन्न जगहों पर पालकी का स्वागत किया। नगर मे भ्रमण कर वापस मंदिर पर आये यहा पर भोले बाबा की महाआरती उतारकर भक्तों को महाप्रसाद का वितरण किया गया।

इसलिए मनाया जाता महाशिवरात्रि का पर्व-

महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव एवं माता पार्वता का शुभ विवाह हुआ था। जो की भगवान शिव अपने निवास कैलाश पर्वत से भूत-प्रेत, देव- दानव, त्रिदेव, समस्त जीव- मात्रा उन की बारात में शामिल हुए थे। भगवान शिव नंदी पर सवार होकर हिमालय के महाराज हिमावन की पुत्री माता पार्वता के यहां बारात लेकर गए थे। इसी विवाह को महाशिवरात्रि के नाम से जाना जाता है। इस दिन समस्त महिला, पुरुष, बच्चे, बुजुर्गो ने शिव लिंग पर जलाभिषेक कर दूध, दही, बिल पात्र, टेसू, आंकड़े, धतूरे के पुष्प, नारियल, हार- फूल अर्पीत कर पूजा अर्चना भी की गई।

पांच क्विंटल खिचड़ी की प्रसाद वितरित की-

शिवरात्रि के एक दिन पूर्व सार्वजनिक श्री गणेश मंदिर मित्र मंडल द्वारा भी छड़ी यात्रियों का 5 क्विंटल खिचड़ी की प्रसादी का वितरण किया गया। शाम को भजन संध्या में भोले बाबा, खाटु श्याम व सांवरिया सेठ के एक से बढ़कर एक सुमधुर भजनों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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