नानी बाई का मायरा में महिलाओं एवं पुरुषों ने झूमकर किया नृत्य
21/Jan/2025
ब्यूरो रिपोर्ट mpkikhabar रतलाम
रतलाम (Ratlam mp)- नानी बाई का मायरा का आयोजन कस्तूरबा नगर, गली नंबर 6 स्थित बगीचे में मनीषा मनोज शर्मा मित्र मंडल द्वारा किया जा रहा है। मंगलवार को दूसरे दिन कालिका माता सेवा मंडल ट्रस्ट, कानकुबज ब्राह्मण समाज, दधीचि समाज, सखवाल समाज, औदिच्य ब्राह्मण समाज, पूर्व महापौर एवं माहेश्वरी समाज अध्यक्ष शैलेंद्र डागा के साथ सभी समाज अध्यक्ष एवं पदाधिकारी द्वारा पोथी पूजन कर आयोजक मनीषा शर्मा व मनोज शर्मा का सभी समाज के अध्यक्षों द्वारा दुपट्टा पहन कर स्वागत किया गया। अनिरुद्ध मुरारी ने दूसरे दिन के नानी बाई मायरे में कहां कि नानी बाई का मायरा एक प्रसिद्ध धार्मिक कथा है, जो भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और चमत्कारों पर आधारित है। इस कथा का दूसरा दिन बहुत महत्वपूर्ण होता है। क्योंकि इसमें नानी बाई के पिता नरसी जी भगत की श्रद्धा और भगवान श्रीकृष्ण की लीला का विस्तार से वर्णन होता है। दूसरे दिन की कथा में बताया जाता है कि नरसी जी भगत के घर में गरीबी होने के कारण वे अपनी बेटी नानी बाई के ससुराल में मायरा भरने (समारोह में उपहार और धन देने) की स्थिति में नहीं थे।नानी बाई की ससुराल वालों ने मायरा भरने का निमंत्रण भेजा। लेकिन नरसी जी असमर्थ थे। नरसी जी ने अपनी सारी समस्याओं का समाधान भगवान श्रीकृष्ण से प्रार्थना करते हुए मांगा। उनकी गहन भक्ति और विश्वास ने भगवान को प्रकट होने पर विवश कर दिया। भगवान श्रीकृष्ण ने नरसी जी से वादा किया कि वे स्वयं नानी बाई के मायरे का भार उठाएंगे।
भगवान श्रीकृष्ण की लीला-
दूसरे दिन भगवान श्रीकृष्ण भव्य रूप में रथ पर बैठकर नानी बाई के मायरे में पहुँचते हैं। वे अपने साथ अपार धन, सोना, चांदी, और अनमोल वस्त्र लेकर जाते हैं। भगवान की भक्ति और उनकी कृपा से पूरा मायरा सम्पन्न हो जाता है। ससुराल पक्ष के लोग नरसी जी की भक्ति और भगवान श्रीकृष्ण की शक्ति देखकर आश्चर्यचकित हो जाते हैं। यह कथा यह संदेश देती है कि सच्चे भक्त की भगवान कभी भी मदद करने से पीछे नहीं हटते है,उक्त बात नानी बाई के मायरे में कही। मुरारी द्वारा सुमधुर भजनों की प्रस्तुतियों की गई। जिसमें महिलाओं और पुरुषों ने जमकर नृत्य किया तथा अंत में आरती निगम अध्यक्ष मनीष मनोज शर्मा सहित श्रद्धालु एवं भक्त जनों ने की।




