सैलाना नगर में आर्य समाज के चार दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन आचार्य योगेश दत्त ने सनातन का महत्व समझाया

रतलाम- (Ratlam) जिले के सैलाना नगर में आर्य समाज के तत्वाधान में चल रहे चार दिवसीय कार्यक्रम में गुरुवार रात आचार्य योगेश दत्त द्वारा भजन के माध्यम से और के द्वारा प्रवचन के माध्यम से सनातन की परिभाषा समझाई गई। उन्होंने कहा कि सनातन वह है जो पहले था, अब भी है, और आगे भी रहेगा। ईश्वर पहले भी था, आज भी है, और आगे भी रहेगा। जीवात्मा पहले भी थी, आज भी है, और आगे भी रहेगा। मूल प्रकृति पहले भी थी, आज भी है, और आगे भी रहेगी। परमात्मा का वेद ज्ञान सृष्टि के आरंभ में था, आज भी है, और आगे भी रहेगा। यह सनातन की परिभाषा है। महर्षि मनु ने जब पहला संविधान लिखा तो उसमें धर्म की व्याख्या की। धृति, क्षमा, दम, अस्तेय, शोच, इंद्रीनिग्रह, धी विद्या सत्य क्रोधों धर्म के 10 लक्षण कहे।
आचार्य जी ने कहा कि कोई किसी के प्रति हिंसा करता है पर जब स्वयं पर हिंसा आती है तो वह हाथ जोड़ लेता है। हमारे ऊपर सैकड़ों वर्षों तक आक्रमण हुऐ। कई आतताईयो को जब मुंहतोड़ जवाब दिया गया तब वह अपने जान की भीख मांगने लग गए। अर्थात संसार में हिंसा कोई नहीं चाहता यह धर्म के लक्षण है। वार्ड नंबर 12 की पार्षद आशा कसेरा के प्रतिनिधी किशोर कसेरा द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया और प्रसाद वितरण किया।




