गुरु के रूप में द्रोणाचार्य और रामकृष्ण तथा शिष्य के रूप में अर्जुन और विवेकानंद बने

रतलाम- (Ratlam) संपूर्ण श्रीमद् भागवत कथा का सार सनातन मूल्यों को स्थापित करते हुए तत्कालीन जीवन शैली के मर्यादित आचरण का जय घोष करता है। महाभारत काल के दौरान घटित घटनाएं हमें अंदर तक द्रवित कर देती है।
महाभारत के अनेकों प्रसंग हमारी सास्कृतिक आस्थाओं पर चोट भी करते हैं और दुख भी देते हैं, लेकिन ऐसे प्रसंग भी है जो हमें प्रेरणा देते हैं और विकट परिस्थितियों से निकलने का मार्ग भी प्रकाशित करते हैं। गुरु द्रोणाचार्य द्वारा दीक्षित महान धनुर्धर अर्जुन को युद्ध से विरक्ति के दौरान गुरु दीक्षा ने ही इतिहास रचने की प्रेरणा दी। अर्जुन ने इसी शिक्षा के फल स्वरुप गुरु पुत्र अश्वत्थामा का वध कर दिया। वही आधुनिक भारत की बात करें तो परम पूज्य गुरु शिरोमणि रामकृष्ण परमहंस ने भी विश्व विख्यात सनातन धर्म प्रणेता स्वामी विवेकानंद जैसे शिष्य को अपनी धरोहर बनाकर प्रस्तुत किया जो अपनी धार्मिक मान्यताओं को नवीन रूप से स्थापित करने में सफल हुए।
वहीं सनातन धर्मावलंबियों को आडंबर मुक्त जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान की। श्रीमद् भागवत कथा ऐसे नायकों का बहुमान करते हुए उनके कार्यों का अनुसरण करने का अनुरोध करती है। स्वामी ने अपने गुरु की दी हुई शिक्षा को समूचे विश्व में प्रतिपादित किया जो आज भी सर्वत्र प्रासंगिक है। इसलिए गुरु बना है तो गुरु द्रोणाचार्य और रामकृष्ण परमहंस की तरह बने और शिष्य बनाना है तो अर्जुन और विवेकानंद की तरह बनाएं।
उपरोक्त सारगर्भित व्याख्यान मंगल मूर्ति रेजिडेंसी में स्व. मुरारी लाल शर्मा, नर्मदा सेवी शर्मा, प्रकाश चंद शर्मा की स्मृति में चल रही संगीतमय सात दिवसीय भागवत कथा के दूसरे दिन पंडित योगेश्वर शास्त्री ने व्यक्त किये।
आपने कहा की भागवत कथा मनुष्य के सातों जीवन का उद्धार करता है। कलयुग में श्रेष्ठ जीवन जीने का सर्वोत्तम उपाय श्रीमद् भागवत कथा की शरण में रहना है।
कथा पश्चात आरती में प्रसिद्ध पर्यावरण विद डॉक्टर खुशाल सिंह पुरोहित, आर्ट ऑफ़ लिविंग के शैलेंद्र व्यास, सर्व ब्राह्मण सभा से अरविंद मिश्रा, निमिष व्यास, महेश व्यास, कमलेश पालीवाल, हरी कृष्ण बड़ोदिया, मनीष जोशी, रमेश परमार, प्रवीण शर्मा मंदसौर, लवकेश जोशी, अखिलेश राजावत सैलाना आदि सम्मिलित हुए और स्वामी जी का पुष्पाला से अभिनंदन किया।
आरंभ में पोथी कथा की पूजा आरती एवं स्वामी का अभिनंदन कैलाश शर्मा, जय श्री शर्मा, महेश शर्मा, तृप्ति शर्मा, दिनेश शर्मा, कुंतल शर्मा, सुनील शर्मा, रति शर्मा, निखिलेश शर्मा, रजनी शर्मा, प्रियेश शर्मा, अनुपमा शर्मा, विनोद शर्मा, विमला शर्मा, राजेंद्र व्यास, नीता व्यास, प्रशांत व्यास, प्रगति व्यास, महेंद्र व्यास, प्रियंका व्यास, दीपक व्यास, रुचिका व्यास, प्रमुख जोशी, सौम्यथा शर्मा, दिव्यांश शर्मा, गार्गी शर्मा आदि ने किया।
कथा में सर्वश्री राजकुमार हाडा, जगदीश सोनी, देवेंद्र मिश्रा, राधेश्याम हाडा सहित क्षेत्रिय नागरिकों के साथ-साथ अनेक महानुभाव उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन दिलीप वर्मा तथा आभार प्रियेश शर्मा, अनुपमा शर्मा ने व्यक्त किया।




