प्रभु से बढ़कर कोई और सुख और सम्पदा नहीं, भागवत कथा श्रवण करने वालों का सदैव होता है “कल्याण”

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प्रभु से बढ़कर कोई और सुख और सम्पदा नहीं, भागवत कथा श्रवण करने वालों का सदैव होता है “कल्याण”

रतलाम- (Ratlam) इन दिनों जिले के सैलाना नगर के सागर वाटिका बस स्टैंड पर ऋण मुक्तेश्वर, आनंदेश्वर सांस्कृतिक संगम के तत्वाधान में सात दिवसीय चल रही श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा महोत्सव का आयोजन का शुभारंभ गुरुवार को किया गया। कथा के द्वितीय दिवस शुक्रवार को कथा में अमर कथा और शुक देवजी के जन्म का वृतांत का विस्तार से वर्णन किया गया। संत नमन जी महाराज ने कथा की शुरुआत करते हुए कहा कि आप सब पर ठाकुर जी की कृपा है। जिसकी वजह से आप आज कथा का आनंद ले रहे है। श्रीमद भगवत कथा का रसपान कर पा रहें हैं क्योंकि जिन्हें गोविन्द प्रदान करते है जितना प्रदान करते है उसे उतना ही मिलता है। कथा में यह भी बताया की अगर आप भागवत कथा सुनकर कुछ पाना चाहते हैं, कुछ सीखना चाहते है तो कथा में प्यासे बन कर आए, कुछ सीखने के उद्देश्य से, कुछ पाने के उद्देश्य से आएं, तो ये भागवत कथा जरूर आपको कुछ नहीं बल्कि बहुत कुछ देगी।

संत नमन जी महाराज ने कहा कि-

मनुष्य से अपना जीवन सांसारिक भोग में नही कृष्ण भक्ति में बिताएं। मनुष्य जीवन विषय वस्तु को भोगने के लिए नहीं मिला है, लेकिन आज का मानव भगवान की भक्ति को छोड़़ विषय वस्तु को भोगने में लगा हुआ है। उसका सारा ध्यान संसारिक विषयों को भोगने में ही लगा हुआ है। मानव जीवन का उद्देश्य कृष्ण प्राप्ति शाश्वत है। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन का उद्देश्य कृष्ण को पाकर ही जीवन छोड़ना है और अगर हम ये दृढ़ निश्चय कर लेंगे कि हमें जीवन में कृष्ण को पाना ही है तो हमारे लिए इससे प्रभु से बढ़कर कोई और सुख, संपत्ति या सम्पदा नहीं है।

भागवत कथा श्रवण करने वालों का सदैव कल्याण करती है।-

भगवत कथा के समय स्वयं श्रीकृष्ण आपसे मिलने आए हैं। जो भी इस भागवत के तट पर आकर विराजमान हो जाता है, भागवत उसका सदैव कल्याण करती है। उन्होंने कहा कि बिना जाति और बिना मजहब देखे इनसे आप जो मांगे ये आपको वो मनवांछित फल देती है और अगर कोई कुछ न मांगे तो उसे मोक्ष परियन्त तक की यात्रा कराती है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। शुक्रवार को भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर कथा के लाभार्थी ईश्वरलाल राठौड़ ने लाभ लिया और पोथी पूजा की। सैलाना रियासत के महाराजा विक्रम सिंह ने भी कथा में उपस्थित हो कर पोथी पूजन किया।

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