रतलाम जिला पंचायत सीईओ ने रिश्वतखोर सरपंच को किया पृथक

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रतलाम जिला पंचायत सीईओ ने रिश्वतखोर सरपंच को किया पृथक

ग्राम पंचायत ईटावाखुर्द सरपंच पद से पृथक

रतलाम- (Ratlam) विहित प्राधिकारी एवं जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रृंगार श्रीवास्तव ने बताया कि ग्राम पंचायत ईटावाखुर्द (जनपद पंचायत रतलाम) के सरपंच धनश्याम कुमावत के विरूद्ध शिकायतकर्ता विनोद डाबी पिता लालूराम डाबी निवासी ग्राम बिन्जाखेड़ी तहसील व जिला रतलाम के द्वारा लोकायुक्त उज्जैन को की गई। शिकायत के आधार पर सरपंच ग्रा.पं. ईटावाखुर्द घनश्याम कुमावत को 17 अप्रैल को शिकायतकर्ता से राशि रूपए 20,000 की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ लोकायुक्त उज्जैन के द्वारा ट्रेप किया जाकर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित अधिनियम 2018) की धारा 7 अंतर्गत 18 अप्रैल को अपराध पंजीबद्ध किए जाने के कारण लोकायुक्त द्वारा सरपंच ग्रा.पं. ईटावाखुर्द घनश्याम कुमावत के विरूद्ध नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही की गई।

आधार पर सरपंच घनश्याम कुमावत के विरूद्ध न्यायालय जिला पंचायत रतलाम में धारा 40 के तहत दर्ज प्रकरण में अनावेदक सरपंच की समुचित सुनवाई उपरांत प्रकरण में अनावेदक सरपंच घनश्याम कुमावत को एक लोक सेवक होकर कार्य के बदले रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े जाकर भ्रष्टाचार में लिप्त होने का दोषी पाया जाना प्रमाणित पाया गया।

घनश्याम कुमावत का लोकहित में पद पर बने रहना अवांछनीय पाये जाने के कारण, म.प्र.पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 40 (1) (ख) के तहत सरपंच ग्राम पंचायत ईटावाखुर्द पद से पृथक किया जाता है। म.प्र.पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 40 (1) के तहत पद से पृथक किया गया व्यक्ति तत्काल ऐसी किसी भी पंचायत का सदस्य नहीं रहेगा, जिसका कि वह सदस्य है। ऐसा व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन निर्वाचन के लिए 6 वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित हो जाएगा।

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