बाल विवाह समाज में एक अभिशाप है-एडवोकेट राठौड

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बाल विवाह समाज में एक अभिशाप है-एडवोकेट राठौड

ब्यूरो रिपोर्ट mpkikhabar रतलाम 

रतलाम- (Ratlam) बाल विवाह समाज के लिए एक अभिशाप है। बच्चों के अधिकारों का निर्मम उल्लघंन है। बाल विवाह से प्रभावित बच्चों को अन्य बच्चों की अपेक्षा अधिक देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता होती है, वहीं अभिभावकगण शासन की अनेक कल्याणकारी योजना का लाभ लेने से वंचित हो जाते हैं।

यह विचार, सैलाना जनपद सभागार में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित बाल विवाह मुक्त भारत निर्माण गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए गायत्री परिवार के तहसील समन्वयक एवं वरिष्ठ अधिवक्ता कान्तीलाल राठौड़ ने व्यक्त किये। आपने कहा कि समाज को समझना चाहिए कि बच्चों के खेलने कुदने और पढ़ने लिखने की उम्र में उनके मौलिक अधिकारों से वंचित करने का उन्हें कोई अधिकार नहीं है। बाल विवाह जैसी कुप्रथा को बन्द करने की जिम्मेदारी समाज की है। गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए जनपद अध्यक्ष कैलाशी चारेल ने कहा कि गांव के लोगों को बाल विवाह के दुश्परिणाम, समझाकर तथा समय पर शादी विवाह करने के लाभ बतावें जिससे बाल विवाह जैसी कुप्रथा पर रोक लगे।

एडवोकेट राठौड़ ने गोष्ठी में उपस्थित आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को बाल विवाह के विरुद्ध कार्यकरने की शपथ दिलवाई। इस अवसर पर महिला बाल विकास की प्रभारी परियोजना अधिकारी पर्यवेक्षक दीपा चौधरी सहित आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका सहित उपस्थित थी। गोष्ठी का संचालन व आभार पर्यवेक्षक ज्योति गोश्वामी ने किया।

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