सैलाना नगर परिषद अध्यक्ष ने जिला कलेक्टर राजेश बाथम को लिखा पत्र

"जानकारी अच्छी लगी? इसे अपने दोस्तों से साझा करें।"

सैलाना नगर परिषद अध्यक्ष ने जिला कलेक्टर राजेश बाथम को लिखा पत्र

स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह स्थल पर प्रोटोकॉल का किया उल्लंघन। नगर परिषद अध्यक्ष को तीसरी पंक्ति में बैठाया

रतलाम- (Ratlam) जिले के सैलाना नगर के कृषि उपज मंडी प्रांगण में स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में मयार्दाओं की खुलेआम धज्जियां उड़ती दिखाई दी। जिस पर सैलाना नगर परिषद अध्यक्ष चैतन्य शुक्ला ने जिला कलेक्टर राजेश बाथम को एक पत्र लिखा है‌।

बतादें की सैलाना विकासखंड मुख्यालय पर आयोजित मुख्य समारोह में एसडीएम मनीष जैन द्वारा प्रोटोकॉल नियमों को ताक पर रखकर सैलाना नगर परिषद अध्यक्ष और नगर के प्रथम नागरिक चैतन्य शुक्ला को न केवल मंच से वंचित किया गया। बल्कि की संवैधानिक पद की गरिमा का भी घोर अपमान किया गया। नगर परिषद अध्यक्ष चैतन्य शुक्ला ने इस पर गहरा रोष जताते हुए जिला कलेक्टर को पत्र सौंपा है। पूर्व विधायक हर्ष विजय गेहलोत ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। नगर परिषद अध्यक्ष ने पत्र में कहा है कि संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार निर्वाचित जनप्रतिनिधि को समारोह में विशिष्ट स्थान दिया जाना चाहिए था। लेकिन एसडीएम ने नियमों की अनदेखी की। यह केवल व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि पूरे जनादेश का अपमान है। उल्लेखनीय है कि स्वतंत्रता दिवस के समारोह में निवार्चित जनप्रतिनिधि नगर परिषद अध्यक्ष को तीसरी पंक्ति में स्थान दिया गया। जबकि पहली एंव दूसरी पंक्ति में भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्षों एवं सामान्य कार्यकर्ताओ तक को स्थान दिया गया था।

चैतन्य शुक्ला ने सवाल उठाया कि जब संविधान और प्रोटोकॉल के अनुसार नगर परिषद अध्यक्ष को स्थान मिलना चाहिए। तब जिला प्रशासन के अधिकारी अपनी मनमानी से लोकतांत्रिक मयार्दाओं को क्यों रौंद रहे हैं? उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक प्रवृत्ति बताया। पत्र में स्पष्ट लिखा गया है कि सैलाना एसडीएम मनीष जैन का यह रवैया न केवल संवैधानिक पद की गरिमा घटाता है, बल्कि जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को भी अपमानित करता है। यदि राष्ट्रीय पर्व पर भी ऐसी लापरवाही और मनमानी होगी, तो लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा कैसे होगी? नगर परिषद अध्यक्ष ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि संवैधानिक पदों का सम्मान नहीं हुआ तो जनता का भरोसा लोकतांत्रिक संस्थाओं से उठ सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *