सैलाना में देखिए एक मजेदार वाकिया, अब किसानों की जगह उनके दस्तावेज लगते हैं, लाईन में

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सैलाना में देखिए एक मजेदार वाकिया, अब किसानों की जगह उनके दस्तावेज लगते हैं, लाईन में

खाद वितरण केंद्र पर लंबे समय तक क्यू में लगने से बचने का किसानों ने किया एक नया तरीका इजाद

ब्यूरो रिपोर्ट mpkikhabar रतलाम, ब्यूरो चीफ कृष्णकांत मालवीय सैलाना 

रतलाम- (Ratlam) मध्यप्रदेश के रतलाम जिले के सैलाना नगर की कृषि उपज मंडी परिसर में स्थित सहकारी विपणन संस्था में एक आश्चर्य चकित करने वाली खबर सामने आई है। खाद वितरण केंद्र पर अब इंसान नहीं बल्कि उनके दस्तावेज क्यू (लाईन) में लगते हैं।

सैलाना क्षेत्र में भले ही खाद की कोई बहुत अधिक किल्लत न हो, पर क्षेत्र के किसानों को खाद के लिए मारामारी का सामना तो करना ही पड़ रहा है। सैलाना के कृषि उपज मंडी परिसर में स्थापित सैलाना सहकारी विपणन संस्था में अत्यधिक दबाव के कारण अल सुबह से ही कतार लगना शुरू होती है। मजेदार बात तो यह रही की क्यू में खड़े रहने से बचने के लिए स्वयं किसानों ने एक जोरदार तरीका ईजाद किया। जिसमें उन्हें तो खड़ा नहीं रहना पड़ता है, लेकिन उनके जरूरी दस्तावेज जरूर क्यू में लग जाते हैं‌।

Mpkikhabar के ब्यूरो चीफ ने किया केंद्र का दौरा-

बुधवार को जैसे ही इस खबर की जानकारी मिली। वैसे ही mpkikhabar के ब्यूरो चीफ कृष्णकांत मालवीय ने सैलाना नगर की कृषि उपज मंडी परिसर के इस केंद्र का दौरा किया तो यह जानकारी सामने आई कि जो किसान पहले पहुंच जाता है, वह अपने जरूरी दस्तावेज लाइन में लगाकर उस पर पत्थर रख देता है। बाकी सभी धीरे-धीरे उसके पीछे रखते जाते हैं।

दरअसल सैलाना कृषि उपज मंडी के इस खाद वितरण केंद्र पर अधिक दबाव होने का एक बड़ा कारण यह भी है की मंडी परिसर में विभिन्न स्थानों के किसान अपनी उपज बेचने आते हैं और यहीं से खाद खरीदना ज्यादा पसंद करते हैं। इसलिए सैलाना सहित आस-पास के गांवो का भी जब यहां दबाव पड़ा तब यहां थोड़ी भीड़ व अफरा तफरी हुई। इस अफरा-तफरी से बचने के लिए एवं लाइन में लंबे समय तक खड़े रहने से बचने के लिए किसानों ने स्वयं ही अपने जरूरी दस्तावेज पावती, आधार कार्ड आदि की फोटोकॉपी के कागजात क्यू में लगाकर उसके ऊपर पत्थर रखकर अपने आप को उस जगह से किनारा कर लिया। यहां ईमानदारी यह भी बरती जा रही है कि कोई भी कागज के हाथ नहीं लगाता। अगले आने वाले व्यक्ति ठीक उसके पीछे अपने कागज रखकर उसके ऊपर पत्थर रखकर इधर-उधर टहलने लग जाते है।

अल सुबह से शुरू होती है, यह कार्रवाई-

दरअसल वितरण केंद्र पर प्रातः 10 से शाम 5:00 बजे तक वितरण कार्य चलता है। परंतु किसान उसके पूर्व ही वहा पहुंच जाते हैं। सुबह 5:30 से 6 बजे से किसानों का इस केंद्र पर पहुंचना शुरू हो जाता है। अब स्थिति यह है कि वे अपने जरूरी दस्तावेज को लाइन में लगाकर खुद इधर- उधर टहलना शुरू कर देते हैं। इस पूरी व्यवस्था में किसी को भी कोई विशेष तकलीफ नहीं। नईदुनिया प्रतिनिधि ने नारायणगढ़ के फतेह सिंह जाट, सैलाना के राकेश, आंबाकुड़ी के भांणजी, देवरुडा के खजुराम, डोकरियाकुंड की धापू बाई से चर्चा की तो इनमें से कुछ किसान दो-तीन दिन से चक्कर काट रहे हैं। पर उनका नंबर नहीं आया, तो आज वें फिर इस प्रक्रिया के तहत खाद्य खरीदने आए थे। दरअसल मंगलवार को सर्वर डाउन होने के कारण खाद वितरण में समस्या पैदा हुई। इसलिए ये स्थिति निर्मित हुई। पर हैंना, आश्चर्य चकित करने वाली यह खबर कि अब इंसान नहीं बल्कि उनके दस्तावेज क्यू में लगते हैं।

उधर संस्था के प्रबंधक सुरेंद्र सिंह राठौर ने बताया कि खाद की कोई किल्लत नहीं है। पर कल सर्वर नहीं चला इसलिए भीड़ उमड़ी। हमारी संस्था के तीन खाद वितरण केंद्र है। परंतु ज्यादा भीड़ यहां मंडी परिसर में संस्था होने के कारण लगती है। किसान यहीं से अपनी जिंस बेचकर खाद खरीदना पसंद कर रहे हैं। बहरहाल खाद की कोई विशेष समस्या नहीं है। सभी को समय पर खाद्य पर्याप्त मिल रहा है।

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