चायनीज मांझे के ट्रांसमिशन लाइनों से संपर्क में आने से संभावित दुर्घटना के बचाव के लिए एम.पी. ट्रांसको का रोको-टोको अभियान

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चायनीज मांझे के ट्रांसमिशन लाइनों से संपर्क में आने से संभावित दुर्घटना के बचाव के लिए एम.पी. ट्रांसको का रोको-टोको अभियान

11/Jan/2025

ब्यूरो रिपोर्ट mpkikhabar रतलाम 

रतलाम (Ratlam,mp)- एम.पी. ट्रांसको (मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी) ने रतलाम की ट्रांसमिशन लाइनों के समीप, खासकर मकर संक्रांति पर्व के अवसर पर चायनीज मांझे से पतंग उड़ाने के कारण संभावित दुर्घटना की आशंकाओं पर अंकुश लगाने व नागरिकों को सतर्क व सुरक्षित करने रतलाम सहित समूचे प्रदेश में एम.पी. ट्रांसको ने रोको-टोको अभियान चलाया है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने भी आग्रह किया है कि ट्रांसमिशन लाइनों के पास पतंग नहीं उड़ाये। एम.पी. ट्रांसको के मुख्य अभियंता संदीप गायकवाड़ ने बताया कि रतलाम में बहुतायत पतंग उड़ाये जाने वाले संवेदनशील क्षेत्रों में नागरिकों से व्यक्तिगत संपर्क करने के अलावा पोस्टर बैनर एवं पी.ए. सिस्टम के माध्यम से उन्हें सचेत एवं सतर्क किये जाने का अभियान भी चलाया जा रहा है। जिससे नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके साथ ही उपभोक्ताओं को विद्युत के अनावश्यक व्यवधान का सामना न करने पडे़। दरअसल प्रदेश में कुछ स्थानों पर ट्रांसमिशन लाइनों में चायनीज मांझा के साथ पतंग फंसने की घटनाओं के बाद विद्युत व्यवधान हुआ था तथा पतंग उड़ाने वालों को भी नुकसान पहॅुचा था। लेकिन एम.पी. ट्रांसको के संवेदनशील प्रोटेक्शन सिस्टम के 100 प्रतिशत ऑपरेट होने से बड़ी जनधन हानि से बचा जा सका था।

क्यों घातक है चायनीज मांझा-

चायनीज मांझा चीन से आने वाले धातु से लिपटी पतंग की डोरी होती है। इसमें कई तरह के केमिकल और धातुओं का इस्तेमाल किया जाता है, जो डोरी को बिजली का अच्छा सुचालक बना देता है। जो संपर्क में आने से पतंग उड़ाने वाले के लिये घातक साबित होता है। साथ ही ट्रांसमिशन लाइन में लिपटने से व्यापक क्षेत्र में विद्युत व्यवधान और जनधन हानि की आशंका रहती है।

ये क्षेत्र है संवेदनशील-

रतलाम क्षेत्र में बाजन खेड़ा, जडबासा कला, सिमलाबदा, कलोरी शाइना आदि क्षेत्र चायनीज मांझे के कारण संभावित दुर्घटना के लिये अति संवेदनशील क्षेत्र है। जहां पर ट्रांसमिशन लाइनों के संपर्क में न आने के लिये सुरक्षा, सतर्कता एवं सजगता अति आवश्यक है।

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