धिक्कार हैं, वो शिक्षा प्रणाली जहां की प्रवेश निति कुछ ऐसी हो
ब्यूरो रिपोर्ट mpkikhabar रतलाम, कृष्णकांत मालवीय सैलाना
रतलाम- (Ratlam) धिक्कार हैं, वो शिक्षा प्रणाली जहां की प्रवेश निति कुछ ऐसी हो कि अधिक प्रतिभाशाली विद्यार्थी का प्रवेश ही ना हो और उसकी आंखों से आंसू इस बात के लिए टपक पड़े की उसे आगे की पढ़ाई के लिए कोई संस्था ही नहीं मिल रही हैं। इन दिनों ना केवल सैलाना में ही बल्कि पूरे प्रदेश के कक्षा नौवीं में प्रवेश के लिए 13 वर्ष से कम आयु के सैंकड़ों विद्यार्थियों को ऐसी ही त्रासदायक स्थिति से रूबरू होना पड़ रहा हैं। दरअसल माध्यमिक शिक्षा मंडल की इस सत्र की प्रवेश निति संस्था प्राचार्यों को कम आयु वाले विद्यार्थियों के नौवीं में प्रवेश के लिए रोक रही है। ऐसे में कई बार विद्यार्थी सिसकियां भरने लगते हैं।तो अभिभावक उन्हें समझाते नजर आते हैं।
ऐसे समझिए पूरा मामला-
दरअसल माध्यमिक शिक्षा मंडल की इस वर्ष के लिए घोषित प्रवेश नीति में साफ लिखा हैं कि जो भी विद्यार्थी कक्षा नौवी में प्रवेश ले वो 13 वर्ष का हो। इससे कम को प्रवेश नहीं दिया जाए। ऐसे में अगर प्राचार्य प्रवेश दे भी दे तो सम्बन्धित विद्यार्थी का नामांकन ही नहीं होगा। इतना ही नहीं आदेश में ऐसा करने पर प्राचार्यों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की चेतवानी भी दी गई हैं। अब भला ऐसे में कौन रिस्क लेगा प्रवेश देने की।
असमंजस वाली स्थिति का ये तीसरा साल-
ये कोई पहला साल नहीं हैं। जब ये परेशानी सामने आई हो। 2023 में भी उम्र प्रतिबंध के आदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल ने जारी किए थे। तब प्राचार्यों ने अपने स्तर पर 13 से कम वालों को भी नौवीं में प्रवेश दिए थे। पर उन्हें कहा गया था कि अगर माध्यमिक शिक्षा मंडल उनके नामांकन नहीं स्वीकारेगा तो ये प्रवेश स्वतः ही रद्द हो जायेंगे। उधर तब प्रदेश भर से उठी मांग के आगे बेबस हो कर मंडल ने 20 नवम्बर 23 को एक आदेश जारी कर उम्र बंधन खत्म कर दिया था। तब जा कर नामांकन हुए। 2024 में फिर प्रवेश नीति में 13 से कम के उक्त कक्षा में प्रवेश रोके। विरोध होने पर 8 जुलाई को शिथिलता प्रदान करते हुए फिर उम्र बंधन समाप्त किया गया।
पर साफ लिखा कि अगले सत्र में ऐसा नहीं होगा-
उधर बीते वर्ष 8 जुलाई को मंडल ने उम्र में शिथिलता का जो आदेश जारी किया था वो सिर्फ़ 2024 के लिए ही था। उसमे साफ लिखा था कि ये केवल उसी सत्र में लागू हैं। जानकारों का मत हैं कि इस बात की संभावना काफी क्षीण हैं कि इस वर्ष आयु प्रतिबंध हटाया जाए। क्योंकि पिछले साल के आदेश की भाषा से तो ऐसा ही प्रतीत होता हैं।
ज्ञान प्राप्ति की कोई उम्र नहीं होती-
विद्वानों का हमेशा से ही ये मत रहा है कि ज्ञान प्राप्ति में उम्र बाधक नहीं होती। लेकिन यहां तो प्रतिभाशाली और कम उम्र में अच्छा अध्ययन कर लेना ही गोया घातक सिद्ध हो गया। ऐसे विद्यार्थियों को साल भर घर बैठने की नौबत आ गई जिन्होंने 13 साल की उम्र के पहले आठवीं पास कर ली।
तब और विकट स्थिति-
उधर तब ओर विकट स्थिति पैदा हो रही हैं जब जिस संस्था से विद्यार्थी ने आठवीं उत्तीर्ण की हो वो संस्था उस विद्यार्थी को कक्षा नौवीं में प्रवेश देने के लिए इसलिए इनकार कर दे क्यूंकि विद्यार्थी की आयु 13 वर्ष पूर्ण नहीं हैं। नगर की तीनों प्रमुख सरकारी और अन्य निजी शिक्षण संस्थाओं में यहीं हो रहा हैं। संस्था उन्हें ही मजबूरी में त्याग रही हैं जो उनके यहीं से आठवीं उत्तीर्ण हैं।
ये होना था-
दरअसल होना ये था कि सत्र 2018-19 से ये लागू होना थी। तब से ही इसे कक्षा पहली से लागू किया जाना था। तब उस वर्ष कोई भी विद्यार्थी अगर 6 वर्ष से कम आयु का कक्षा पहली में प्रवेश नहीं पाता तो आज कोई भी 13 वर्ष की आयु पूर्ण होने से पूर्व कक्षा नौवीं में पहुंच ही नहीं पाता। और ये गंभीर समस्या भी उत्पन्न नहीं होती।
सैकड़ों ऐसे विद्यार्थी अकेले सैलाना क्षेत्र में भटक रहे हैं-
जानकारों का मत हैं कि अकेले सैलाना में ही सैकड़ों ऐसे विद्यार्थी कक्षा नौवीं में प्रवेश के लिए भटक रहें हैं जिनकी उम्र 13 से कम हैं। निजी विद्यालय भी माध्यमिक शिक्षा मण्डल के नियम मानने के लिए बाध्य हैं,इसलिए वे भी प्रवेश नहीं दे सकते। एक जानकार ने तो यहां तक बताया कि स्थिति ये हो जाती हैं कि ऐसे विद्यार्थी रो पड़ते हैं जब उन्हें मालूम पड़ता है। कि इस वर्ष वे अध्ययन नहीं कर पाएंगे।
सेवानिवृत शिक्षक हेमशंकर अवस्थी कहते हैं कि पूरे प्रदेश में ऐसे बच्चों की संख्या हजारों में हो सकती हैं ,जिनका साल बिगाड़ जायेगा।
विभाग की कोई भूमिका नहीं-
कक्षा नौवीं में 13 वर्ष से कम आयु के विद्यार्थी को प्रवेश नहीं देने का आदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल का हैं। इसमें शिक्षा विभाग की कोई भूमिका नहीं हैं। बदलाव भी मंडल ही कर सकता हैं।
अनीता सागर, जिला शिक्षा अधिकारी रतलाम।
पत्र लिखूंगा-
ये गलत हैं। जल्दी ही माध्यमिक शिक्षा मंडल अपनी नीति बदले। कोई भी प्रवेश से वंचित ना हो। माध्यमिक शिक्षा मंडल को पत्र लिखूंगा।
कमलेश्वर डोडियार, विधायक सैलाना।




