मध्यप्रदेश के सैलाना से राजस्थान के होरी हनुमान मंदिर तक 55 किलो मिटर की विशाल पद यात्रा हुई रवाना

ग्राम सुखेडा में भक्तो का रहा, सह भोज और विश्राम
ब्यूरो रिपोर्ट mpkikhabar रतलाम, ब्यूरो चीफ कृष्णकांत मालवीय।
रतलाम- मध्यप्रदेश के रतलाम जिले के सैलाना नगर से राजस्थान में अति प्राचीन होरी हनुमानजी तक विशाल पद यात्रा गुरुवार को रवाना हुई है। पद यात्रा में बड़ी संख्या में भक्तगण कदम से कदम मिलाकर चलते नजर आए। जय जय सियाराम, वीर बजरंगी की गुज, और बेड बाजो पर जय जय सियाराम के बजते मधुर धुनो व ढोल- नगाडो की ताल पर थिरकते कदम केसरिया लिबास पहने हर एक भक्त के मुंह से जय सियाराम की गूंज से पुरा नगर राममय हो गया। नागरीको के साथ साथ छोटे छोटे बच्चे, महीला और बुजुर्गों ने इस पद यात्रा मे भाग लिया। केशरीया ध्वजा हाथ मे थामे सैलाना नगर से होरी हनुमान तक विशाल पद यात्रा की रवान की हुई।
यह यात्रा करिबन 55 किलो मिटर की तय की गई है। जिसमे नागरीक करीबन मंगलवार शाम 6 बजे तक 35 किलो मिटर पैदल चलकर अपना सफर तय करेगे। वही रात्रि को सुखेङा मे भक्तो का सह भोजकर विश्राम की व्यवस्था संगठनो के पदाधिकारियों द्वारा की गई। अगले दिन मंगलवार को सुबह दोबारा 15 किलो मिटर की दूरी तय करके राजस्थान की सीमा के समीप अति प्राचिन होरी हनुमान महाराज के मंदिर पहुचे। जहा पर नागरिकों ने भगवान होरी हनुमान बावजी के दर्शन कर नए वर्ष की शुरूआत की। कुछ ऐसा ही नजारा एक जनवरी नए वर्ष मंगलवार को दिखाई दिया।
जय बलवीर व्यायामशाला भोई मोहल्ला के तत्वावधान मे विशाल पद यात्रि का आयोजन किया गया। यह पद यात्रा सुबह दस बजे नगर के ओशिन परिषर राम निवास से शुरू की गई। जो की नगर के प्रमुख मार्गो से होते हुए करिया रोङ पर पहुची जहा पर आगे की और रवानगी दि गई। राम भक्त शाम सात बजे सुखेङा पहुचा। जहा पर सह भोजन कर विश्राम किया। अगले दिन मगलवार को पद यात्रा होरी हनुमान मंदिर के लिए रवाना हुआ। राजस्थान के सीमा के समीप होरी हनुमान मंदिर पहुचकर भक्तो ने होरी हनुमान की पुजा अर्चना कर आशिर्वाद लेकर नए वर्ष की शुरूआत की।
जगह-जगह हुआ स्वागत-
नगर से होरी हनुमान मंदिर तक सम्मिलित हुए भक्तो का अनेको चोराहो पर संगठंनो के पदाधिकारीयो ने इस पद यात्रा का साफा श्री फल के साथ पुष्प माला फुलो की पंखुडियो से भव्य स्वागत किया। स्वागत भोई मोहल्ला, बस स्टैङ, सदर बाजार, गणेश मंदिर, पेलेस चौराहा, जुनावास तक किया। कदम से कदम मिलाकर करिया रोङ पर पहुचे जहा से इस पद यात्रा आगे की और रवानगी दी गई।





