सैलाना नगर के घर-घर में गुंजे संजा के गीत

रतलाम- (Ratlam) “संजा पर्व” भाद्रपद माह के शुक्ल पूर्णिमा से पितृमोक्ष अमावस्या तक पितृपक्ष में कुंआरी कन्याओं द्वारा मनाया जाने वाला पर्व है। संजा को कुवारी बालिका सायंकाल के समय पूजती है। ओर पूजते समय बालिकाओ द्वारा ये गीत गलियो मे गुंजे। काजल टीकी लो बई, काजल टीकी लो, काजल टीकी लई ने संजाबाई ने दो, छोटी सी गाड़ी लुड़कती जाये, लुड़कती जाये, जिमे बैठिया संजाबाई ऐसे गीत शाम को घर-घर सुनाई दिये।
संजा के इस सोलह दिन के कार्यक्रम में कुवारी कन्याऐ घर के आगे गोबर से लिप कर या बाजार में तैयार संजा को दिवार पर चिपका कर आरती उतारती है। ऐसी मान्यता है कि कुवारी कन्या अच्छे वर की कामना के लिए यह संजा सोलह वर्षों तक लगातार यह वृत करती है। मान्यता है कि ऐसा वृत करने से मन चाहा वर मिलता है।
चित्र । संजा की आरती उतारती बालिकाएं फोटो




