स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पड़ी उनको ही मंहगी। हाथ गाड़ी में नवजात की मौत मामले में बीएमओ सहित चिकित्सकों व स्टाफ नर्सो पर गिरी गाज
28/Mar/2025
ब्यूरो रिपोर्ट mpkikhabar रतलाम
रतलाम (Ratlam,mp)- मध्यप्रदेश के रतलाम जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित सैलाना नगर में विगत दिवस मध्य रात्रि में गर्भवती महिला को ठेलागाड़ी में ले जाने के दौरान नवजात की रास्ते में ही मौत होने के मामले में बीएमओ सहित दो चिकित्सकों एवं दो स्टाफ नर्सो पर गाज गिरी है। मामला मीडिया में आते ही स्वास्थ्य विभाग ने टीम भेजकर जांच करवाई व दोशी पाए जाने पर दो नर्सो को निलंबित कर दिया। साथ ही ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए आयुक्त स्वास्थ्य विभाग को भी प्रस्ताव भेजा एवं ब्लाक मेडिकल ऑफिसर पीसी कोली को कारण बताओं नोटिस जारी कर बड़े स्तर पर जांच होने तक अपने पद से पृथक कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग की इस बड़ी कार्रवाई से पूरे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
पीड़ित को इधर-उधर भटकाता दिखा स्वास्थ्य विभाग-
दरअसल 23 मार्च को सैलाना के कालिका माता रोड निवासी कृष्णा पिता देवीलाल ग्वाला सुबह 9 बजे अपनी गर्भवती पत्नी को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे तो ड्यूटी पर तैनात नर्स चेतना चारेल ने गर्भवती महिला का परीक्षण कर पति से कहा की डिलेवरी में अभी दो-तीन दिन की देरी है, इसलिए इसे घर ले जाओ। इसी दिन रात्रि 10 बजे कृष्णा की पत्नी को फिर प्रसव पीड़ा हुई तो वह अस्पताल लेकर पहुंचा। उस समय ड्यूटी नर्स गायत्री पाटीदार ने डिलीवरी होने में 15 घंटे का समय बात कर वापस लौटा दिया। इधर कृष्णा अपनी पत्नी को लेकर वापस अपने निवास पर आ गया।
महिला को ठेलागाड़ी में अस्पताल लेकर पहुंचा पीडीत-
लेकिन 1 घंटे बाद ही पत्नी को फिर प्रसव पीड़ा हुई तो घबराते हुए अन्य कोई साधन न होने से मध्य रात्रि में ठेलागाड़ी से ही पत्नी को सैलाना के शासकीय अस्पताल ले जा रहा था। तभी रास्ते में ही उसकी डिलेवरी हो गई और बच्चे की मौत हो गई। इस मामले में गुरुवार को प्रसूता के पति कृष्णा ने एसडीएम मनीष जैन को एक शिकायती पत्र भी दिया था। जिसमें जांच की मांग की जाकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की गई थी।
फिर मचा पूरे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप-
स्वास्थ्य विभाग में इस बात को लेकर हड़कम मच गया कि एक प्रसूता के नवजात की ठेलागाड़ी में मृत्यु हो गई। एवं इसके पीछे अस्पताल कर्मियों की लापरवाही है। जैसे ही मामला मीडिया में आया स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर एम.एस.सागर ने तुरंत रतलाम से डॉक्टर वर्षा कुरील एवं मालती विजुअल को सैलाना भेजकर जांच के आदेश दिए। दोनों अधिकारियों ने जांच में पाया कि नर्सिह ऑफिसर चेतना चारेल एवं गायत्री पाटीदार को सीधे-सीधे दोषी पाए जाने पर निलंबित कर निलंबन अवधि में दोनों का मुख्यालय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पिपलोदा कर दिया गया। उधर ड्यूटी चिकित्सक डॉक्टर शैलेष डांगे द्वारा प्रसूता का परीक्षण नहीं करना भी लापरवाही की श्रेणी में अधिकारियों ने पाया एवं उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए आयुक्त स्वास्थ्य विभाग को प्रस्ताव भेजा गया।
महिला चिकित्सक न होना बड़ी समस्या-
इधर प्रदेश शासन का आदिवासी अंचल में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का दावा धूमिल होता नजर आ रहा है। अरसे से सैलाना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में महिला चिकित्सक का पद रिक्त पड़ा हुआ है। पूरा आदिवासी अंचल स्टाफ नर्सो के भरोसे ही चल रहा है। ऐसे में गरीब व वंचित परिवारों को उपचार में दिक्कत पेश आती है। क्षेत्र के संपन्न परिवार के लोग तो छोटे से छोटे मामले में रतलाम पहुंचकर निजी चिकित्सालयों की सेवाएं ले लेते हैं। परंतु गरीब व वंचित वर्ग के लोगों के लिए तो यह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ही एकमात्र सहारा है और यहां पर इस प्रकार की व्यवस्थाएं निश्चित रूप से प्रदेश शासन के दावों पर सवालिया निशान लगाती है।




