मातृ मृत्यु समीक्षा बैठक कलेक्टर की अध्यक्षता में आयोजित की गई

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मातृ मृत्यु समीक्षा बैठक कलेक्टर की अध्यक्षता में आयोजित की गई

स्टाप डायरिया कैंपेन सह दस्तक अभियान की जिला टास्क फोर्स बैठक संपन्न

रतलाम- (Ratlam) स्टाप डायरिया कैंपेन सह दस्तक अभियान की जिला टास्क फोर्स और मातृ मृत्यु समीक्षा बैठक का आयोजन न्यू कलेक्ट्रेट सभा कक्ष में किया गया। बैठक में प्रस्तुतीकरण देते हुए डीपीएम डॉक्टर प्रमोद प्रजापति ने बताया कि स्टाप डायरिया सह दस्तक अभियान का आयोजन 22 जुलाई से 16 सितंबर तक किया जा रहा है। दस्तक अभियान का उद्देश्य बाल एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना तथा इसकी अवधारणा बाल्यकालीन बीमारियों की रोकथाम और 5 वर्ष तक के समस्त बच्चों को स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाएं देने पर आधारित है।

अभियान के दौरान जिले के विभिन्न आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों को बुलाकर पोषण और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाएगी। अभियान का क्रियान्वयन एएनएम, आशा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सी एच ओ के दल द्वारा किया जाएगा। अभियान की थीम 22 से 28 जुलाई तक अभियान का व्यापक प्रचार प्रसार, 29 जुलाई से 4 अगस्त तक बच्चों में खतरे के लक्षण, 5 से 11 अगस्त तक स्तनपान संबंधी गतिविधियां, 12 से 18 अगस्त तक दस्त रोग प्रबंधन 19 से 25 अगस्त तक स्वच्छता संबंधी गतिविधियां, 26 अगस्त से 1 सितंबर तक एनीमिया के बच्चों की पहचान प्रबंधन एवं रेफरल, 2 से 8 सितंबर को कुपोषित बच्चों की पहचान प्रबंधन एवं रेफरल तथा 9 से 16 सितंबर तक खाद्य विविधता पर आधारित है।

कलेक्टर राजेश बाथम ने कार्यक्रम में विभिन्न विभागों को अपेक्षित सहयोग प्रदान करने के लिए निर्देशित किया। उन्होंने सभी आंगनवाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य केंद्रों पर ओआरएस जिंक कॉर्नर बनाने कार्यक्रम की नियमित रूप से मॉनिटरिंग कर रिपोर्टिंग प्रस्तुत करने और कार्यक्रम का व्यापक प्रचार प्रसार करने के निर्देश दिए। मातृ मृत्यु समीक्षा बैठक में जानकारी देते हुए जिला टीकाकरण अधिकारी डॉक्टर वर्षा कुरील ने बताया कि अप्रैल से जुलाई तक कुल 7 मातृ मृत्यु होना प्रतिवेदित हुआ है। इनमें से चार मातृ मृत्यु मेडिकल कॉलेज में एक मातृ मृत्यु प्राइवेट मेडिकल कॉलेज गुजरात में तथा अन्य प्राइवेट अस्पतालों में दो मातृ मृत्यु होना पाई गई है। मातृ मृत्यु के मामलों में संस्था पर हुई मृत्यु के प्रकरणवार कारणों का विस्तार से विश्लेषण किया गया। कलेक्टर राजेश बाथम ने प्रत्येक गर्भवती महिला की गर्भावस्था के दौरान प्रथम त्रिमास पंजीयन कर सभी आवश्यक जांच उपचार सेवाएं प्रदान करने के लिए निर्देशित किया।

उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के दौरान खून की कभी एवं अन्य खतरे के लक्षण वाली गर्भवती माता पर सतत निगरानी रखी जाकर उन्हें आयरन सुक्रोज के साथ आवश्यक स्वास्थ्य और पोषण सेवाएं भी प्रदान करें। खतरे के लक्षण वाली गर्भवती माताओ की स्वास्थ्य देखभाल संबंधी प्रतिदिन भेट कर सेवाएं प्रदान की जाए। खतरे के चिन्ह लक्षण वाली गर्भवती माता को आवश्यकता अनुसार फ्रुक्टोज की भी प्रदायगी की जाए। इसके लिए सभी चिकित्सा अधिकारी आवश्यकता अनुसार जिला स्तर पर मांग पत्र प्रस्तुत करें किसी भी स्थिति में गर्भवती माता की गर्भावस्था अथवा प्रसव के दौरान मृत्यु नहीं होनी चाहिए। बैठक के दौरान कलेक्टर राजेश बाथम, सीईओ जिला पंचायत शृंगार श्रीवास्तव, सीएमएचओ डॉक्टर संध्या बेलसरे, सिविल सर्जन डॉ एम एस सागर, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉक्टर ममता शर्मा, जिला कार्यकारी महिला एवं बाल विकास विभाग राधेश्याम बुधौलिया, जिला शिक्षा अधिकारी अनीता सागर, मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा अधिकारी, जिले के सभी संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, विकासखंड चिकित्सा अधिकारी, जिला चिकित्सालय की नर्सिंग ऑफिसर, मातृ मृत्यु प्रतिवेदित होने वाले क्षेत्र की एएनएम तथा अन्य संबंधित अधिकारी कर्मचारी आदि उपस्थित रहे।

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