6 माह पूर्व सैलाना में हुआ साइबर फ्रॉड, अब तक पुलिस के हाथ अपराधी कोसो दुर
रतलाम- (Ratlam) छोटे-मोटे फ्रॉड, छोटी मोटी चोरिया तो लगता है, पुलिस की नजरों में अपराध की श्रेणी में आता ही नहीं। मामला बड़ा हो, रोज खबरों की सुर्खियां बने तो ही पुलिस सक्रिय रहती है। गंभीरता से तफ्तीश होती है और कुछ परिणाम सामने आता है।
सैलाना में गत नवंबर में साइबर फ्रॉड का एक मामला प्रकाश में आया था। पर चूंकि यह मामला कुछ हजार रूपयो के फ्रॉड का था। इसलिए पुलिस ने उसे इतने हल्के में लिया कि संपूर्ण जानकारी उजागर होने के बाद भी मामला जस का तस है। अगर मामला लाखों के फ्रॉड का हो तो ही पुलिस चेतती है अन्यथा नहीं। सबसे आश्चर्यजनक बात तो यह है कि सैलाना के वर्तमान थाना प्रभारी को पता ही नहीं कि इस प्रकार का कोई फ्रॉड का मामला भी सैलाना में हुआ है।
बतादे की बीते 22 नवंबर 2024 को सैलाना निवासी युवा व्यवसायी प्रियंक पिता मंगलेश चंडालिया के साथ 28 हजार से अधिक का साइबर फ्रॉड हुआ। दरअसल एक साइट देखकर उन्होंने पालीताणा जैन तीर्थ जिला भावनगर में 28, 29 व 30 अप्रैल को जैन धर्मशाला बुक कराने के लिए मोबाइल नंबर 9039595258 पर बात की उनसे रूम बुकिंग के लिए। तो इस मोबाइल धारक ने पेमेंट डालने को कहा। मोबाइल धारक के कहे अनुसार प्रियंक ने केनरा बैंक के खाता नंबर 110193271609 पर पहले 12 हजार कुछ देर बाद रुपए 12 हजार 20, फिर 20, फिर रूपए 4 हजार 10 रुपए इस प्रकार से कुल 28 हजार 50 का ट्रांजैक्शन ऑनलाइन कर दिया। इस बैंक का आई एफ एससी कोड CNRB0003773 है। धर्मशाला का नाम नवरत्न धाम पालीताणा बताया गया।
प्रियंक द्वारा बार-बार उसी दिन उक्त मोबाइल नंबर पर संपर्क करने के पश्चात भी जब रूम बुकिंग की स्लिप उधर से नहीं आई तो प्रियंक का माथा ठनका और उन्होंने उक्त मोबाइल धारक से यह राशि वापस करने की मांग की। उन्हें लग गया कि वह ऑनलाइन ठगी का शिकार हो गए हैं। लेकिन दो दिन पश्चात यह मोबाइल बंद मिला। इस बीच अगले दिन 23 नवंबर को वह किसी के कहने पर सैलाना थाने में आवेदन देने पहुंचे तो वहां से यह कहकर उन्हें इनकार कर दिया कि साइबर मामले की सारी रिपोर्ट रतलाम में दर्ज होती है। यहां तक कि उनके आवेदन को भी पुलिस के किसी अधिकारी-कर्मचारी ने हाथ तक नहीं लगाया।
फिर लगाए पुलिस के चक्कर-
प्रियंक ने पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार 1903 पर ऑनलाइन कंप्लेंट भी दर्ज कराई। उन्हें बताया गया था कि साइबर फ्रॉड के मामले इस नंबर पर दर्ज होते हैं। फिर भी कुछ नहीं हुआ तो 3 दिसंबर को प्रियंक जिला पुलिस अधीक्षक रतलाम कार्यालय पहुंचे। वहां अपने तई जानकारी जुटा कर वहां पर साइबर क्राइम ब्रांच में पूरी रिपोर्ट दर्ज करवाई। तब से लगाकर अब तक वह पुलिस अधिकारियों के चक्कर लगाकर हाथ पैर मार चुके हैं। पर मामला कुछ हजार रुपए का है, इसलिए लगता है कि इस साइबर फ्रॉड के मामले में पुलिस की कोई दिलचस्पी ही नहीं है।
जब केनरा बैंक का खाता नंबर, आईएफएससी कोड संबंधित के मोबाइल नंबर आदि उजागर है तो फिर पुलिस ने न जाने क्यों इस मामले को गंभीरता से ही नहीं लिया। यदि गंभीरता से लिया होता तो यह मामला भी अन्य बड़े मामलों की तरह सुलझ चुका होता।
हालांकि सैलाना के वर्तमान थाना प्रभारी उस वक्त सैलाना में पदस्थ नहीं थे। फिर भी साइबर फ्रॉड से मामला जुड़ा होने का कारण उन्हें इस बात की जानकारी होना चाहिए थी। सैलाना थाने पर सुरेंद्र सिंह गडरिया को जब मिडिया ने इस बात की जानकारी दी तो लगभग एक घंटे पश्चात उनसे पुनः संपर्क करने पर उन्होंने कहा कि इस प्रकार का कोई आवेदन हमारे पास है ही नहीं। तो हमें तो कुछ पता ही नहीं। पता होता तो जरूर करते। पुलिस का यह जवाब नि संदेह आमजन में निराशा भरने वाला है।




