सैलाना नगर के शासकीय अस्पताल में अव्यवस्थाओं का आलम

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सैलाना नगर के शासकीय अस्पताल में अव्यवस्थाओं का आलम

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर जिम्मेदार सुनने को नही है तैयार

ब्यूरो रिपोर्ट mpkikhabar रतलाम, कृष्णकांत मालवीय सैलाना।

रतलाम- (Ratlam) आदिवासी क्षेत्र के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल जिले के सैलाना नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से चरमारा चुकी है। साधनों का अभाव, कर्मचारियों की लेतलाली, प्रशासनिक पकड़ का अभाव इन सब बातों के चलते सैलाना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति बद से बदतर हो चली है। सैलाना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के खंड चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर पीसी कोली किसी भी बात का कोई जवाब देने के लिए तैयार नहीं है। उधर कर्मचारी अपने हिसाब से आते-जाते रहते हैं। इसका खामियाजा सीधे-सीधे आमजन को भुगतना पड़ रहा है।

दरअसल सैलाना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों के देखने का समय प्रातः 9:00 बजे से शुरू होता है। इस समय तक चिकित्सक सहित उन कर्मियों को अस्पताल में अपने चेंबर में बैठना जरूरी होता है, जिनसे सीधा-सीधा मरीजों का वास्ता पड़ता है। परंतु अक्सर ना तो अस्पताल की कर्मचारी समय पर उपस्थित होते हैं और कई बार चिकित्सक भी इधर-उधर घूमते हुए दिखाई देते हैं। इस संबंध में मीडिया कर्मियों ने अनेको बार खंड चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर कोली को अवगत कराया पर उनके कानों पर जू तक नहीं रेगी। उधर एंबुलेंस का अभाव भी अखरने वाला है। कई बार घायलों को जिला चिकित्सालय रतलाम भिजवाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीण अंचल की लाखों के आबादी के लिए सैलाना का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ही एक बड़ा सरकारी अस्पताल है। जहां आम जन व गरीब आदिवासी अपना उपचार कराने आते हैं। पर यहां की व्यवस्थाएं उन्हें तकलीफ देती है। पिछले कुछ माह पूर्व दंत चिकित्सा के लिए सैलाना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को मशीन प्रदान की गई थी पर यह मशीन दंत चिकित्सक और विशेषज्ञ के अभाव में महीनों से पड़ी-पड़ी धूल खा रही है। दंत चिकित्सा के मरीजों को अब भी उपचार के लिए या तो निजी दंत चिकित्सक की सेवाएं लेना पड़ती है या उपचार हेतु रतलाम जाना पड़ता है।

उधर अस्पताल भवन का जर्जर होना भी कम त्रासदायक नहीं है। बरसात के दिनों में अक्सर छते टपकती रहती है। कई बार प्लास्टर चरमराकर जमीन पर गिरता रहता है। अपनी जान जोखिम में डालकर मरिज वहां उपचार हेतु भर्ती है व इलाज करवा रहे हैं। सैलाना के सरकारी अस्पताल को एक नए भवन की भी जरूरत है।

कर्मचारियों की लेतलाली परेशानियों का दायक है-

अस्पताल के नियमों के मुताबिक मरीज के लिए प्रातः 9 बजे से दोपहर 2 और उसके पश्चात शाम 5 से 6 बजे तक का समय रहता है। लेकिन कार्यालय समय नियमानुसार प्रातः 10 से शाम 6:00 बजे तक रहता है। परंतु अक्सर देखने में आता है कि इस अलग-अलग समय की व्यवस्था का बेजा फायदा उठाने में कर्मचारी पीछे नहीं रहते हैं।

जिन कार्यालयीन कर्मचारियों को सुबह 10:00 बजे उपस्थित होना होता है। वे देरी से उपस्थित होते हैं और 2:00 बजे बाद अक्सर रफू चक्कर हो जाते हैं। उधर मरीजों से जुड़े कर्मचारी जिन्हें प्रातः 9:00 बजे उपस्थित होना होता है वे कार्यालय समय के हिसाब से या कई बार इससे भी देरी से उपस्थित होते हैं। कुछ इस प्रकार की अव्यवस्था का आलम सोमवार की सुबह सैलाना के मीडिया कर्मियों को देखने को मिला।

सोमवार की सुबह जब कुछ मीडिया कर्मी शासकीय अस्पताल पहुंचे तो चिकित्सक तो उपस्थित थे लेकिन चिकित्सक द्वारा लिखी गई पर्ची की दवाई देने के लिए घंटों कोई उपलब्ध नहीं हुआ। नगर के सक्रिय मीडिया कर्मियों ने तुरंत फोटो खींचकर सोशल मीडिया पर चलाया तो हड़कंप मच गया। और तुरंत आनंद फानन में कर्मचारी की व्यवस्था कर दवाई वितरण कक्ष पर बिठाया गया। तब जाकर उपस्थित मरीजों एवं उनके परिजनों ने राहत की सांस ली। यह कोई पहला अवसर नहीं था। जब ऐसी विकट स्थिति पैदा हुई। सैलाना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आए दिन इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न होती रहती है और जवाबदार कतई ध्यान नहीं देते हैं।

सैलाना के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर पीसी कोली को कुछ माह पूर्व किसी अन्य मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में सैलाना से हटा दिया गया था। किंतु महज दो माह पश्चात फिर उन्हें सैलाना के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर का चार्ज दे दिया गया। और स्थिति पुनः वही की वही है, जो पहले थी। इधर ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर पीसी कोली से जब उनके मोबाइल नंबर पर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो हमेशा की ही तरह उनका मोबाइल नो रिप्लाई हुआ।

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