विवाह के 19 वर्ष बाद गूंजी खुशियों की किलकारी। जिला चिकित्सालय में उपचार से मिला मातृत्व सुख

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विवाह के 19 वर्ष बाद गूंजी खुशियों की किलकारी। जिला चिकित्सालय में उपचार से मिला मातृत्व सुख

रतलाम- (Ratlam) कहा जाता है कि मातृत्व का सुख जीवन के सबसे बड़े सुखों में से एक है। सिविल सर्जन डॉ. एम.एस. सागर ने बताया कि जिला चिकित्सालय रतलाम में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर प्रदायगी के चलते नि संतान दंपति को संतान सुख प्राप्त हुआ है। मातृ एवं शिशु इकाई, जिला चिकित्सालय रतलाम में श्रीमती सुनीता बाई को 42 वर्ष की उम्र तथा 19 वर्ष के वैवाहिक जीवन के बाद संतान की प्राप्ति हुई है।

सुनीता व उनके पति आनंद सिंह 19 वर्ष से संतान न होने के कारण परेशान थे, सुनीता ने गर्भ धारण न होने के कारण कई जगह इलाज भी कराया किंतु उन्हें मातृत्व सुख नहीं मिला। अनन्त: उन्होंने आईवीएफ का सहारा लिया। आईवीफ में अधिक खर्च हो जाने के कारण वे आर्थिक रूप से भी परेशान थे। फिर उनकी मुलाकात जिला चिकित्सालय में डॉक्टर सोनल ओहरी से हुई। डॉक्टर ओहरी ने सिविल सर्जन डॉक्टर सागर के मार्ग दर्शन में मातृ एवं शिशु इकाई में उच्च गुणवत्तापूर्ण मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाएं एवं नि:शुल्क उपचार के बारे में बताया। डॉ. सोनल ओहरी के देखरेख में महिला का उपचार हुआ। गर्भधारण के पश्चात पूरे समय उनके स्वास्थ्य देखभाल एवं निगरानी की गई।

प्रसव का समय नजदीक आने पर उच्च जोखिम का केस होने से निश्चेतना विशेषज्ञ डॉक्टर चेतन पाटीदार से विचार विमर्श कर 19 अप्रैल को सीजेरियन ऑपरेशन द्वारा महिला का प्रसव कराया गया। जिसमें उनको लड़का हुआ जिसका वजन 2.8 किलोग्राम था। ऑपरेशन निश्चेतना विशेषज्ञ, ओटी एवं लेबर रूम की नर्सेस टीम की मदद से सफल रहा। महिला को प्रसव पश्चात मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य चिकित्सा इकाई की हाई डिपेंडेंसी यूनिट में 5 दिवस तक नर्सिंग देखभाल में रखा गया। प्रसूता एवं नवजात पूर्णतः स्वस्थ है। दंपत्ति द्वारा अस्पताल प्रशासन का आभार व्यक्त किया गया एवं शासन की नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रधानमंत्रीजी एवं मुख्यमंत्रीजी को धन्यवाद दिया।

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