भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा ने भील प्रदेश की मांग को लेकर राष्ट्रपति के नाम सैलाना एसडीएम जैन को सौपा ज्ञापन
रतलाम- (Ratlam) भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा ने भील प्रदेश बनाने की मांग को लेकर राष्ट्र पति व प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन सैलाना अनुविभागीय अधिकारी मनीष जैन को सौंपा। ज्ञापन मे बताया गया की भारत के आदिवासी समुदाय से जुड़े ज्वलंत मुद्दे एवं संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत् चार राज्यों का सीमाई इलाका एवं एक केन्द्र शासित प्रदेश को जोड़कर ‘भीलप्रदेश राज्य’ गठन किया जाये। भारतीय उपमहाद्वीप में 20 लाख साल पहले से रह रहे आखेटक-वाध्य संग्राहक मानव समूह के वंशज आदिवासी है। पुरातात्विक स्थल विन्ध्याचल-सातपुडा अरावली पर्वतमाला में क्रमशः बेलन नदी घांटी, भीमबेटका एवं साबरमती नदी बेसिन में मिले है। भारत की इस मूल संस्कृति मानव समूह के संरक्षण के लिए भीलप्रदेश राज्य’ गठन आवश्यक है।
इतिहासकाल में अप्रवास यहूदी, यूनानी, ईरानी, मुस्लिमः ईसाई धर्मी लोगों की बसावट हुई। इस कारण से भारत की मूल संस्कृति, सभ्यता, बोली, धर्म के अस्तित्व की सुरक्षार्थ भील सांस्कृतिक भाषाई ऐतिहांसिक क्षेत्र को जोड़कर ‘भीलप्रदेश राज्य’ गठन होना चाहिए था, मगर आजादी के बाद नहीं हुआ और चार राज्यों में पूरा इलाका बांट दिया गया। राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश की विधानसभाओं में ‘भीलप्रदेश राज्य’ का प्रस्ताव पारित कर केन्द्र सरकार को भिजवाया जाए।
इस अवसर पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष केशुराम निनामा, जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि भारत आदिवासी पार्टी जिला अध्यक्ष चंदू मईडा, सरपंच विश्राम निनामा, सरपंच दिनेश निनामा, सरपंच रमेश खराड़ी, अशोक डामोर, बादल मईडा, ईश्वर डोडियार, कालू सिंह डोडियार, प्रकाश खराड़ी सहित सैकड़ो कार्यकर्ता उपस्थित थे।




