तीर्थराज प्रयागराज में एकता का “महाकुम्भ”

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तीर्थराज प्रयागराज में एकता का “महाकुम्भ”

15/Jan/2025

ब्यूरो रिपोर्ट mpkikhabar प्रयागराज

महाकुंभ के पहले अमृत स्नान पर करोड़ों श्रद्धालुओं ने लागाई डुबकी

प्रयागराज- 144 साल बाद आए महाकुंभ 2025 के पावन अवसर पर पुण्य लाभ लेने के लिए विदेशी श्रद्धालु भी बड़ी मात्रा में त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाने पहुंचे। स्नान के लिए श्रद्धा ऐसी थी कि बुजुर्ग, महिलाएं और युवा, सभी आस्था से भरे हुए रात से ही संगम की ओर बढ़ते दिखे। मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर भारत समेत दुनिया के विभिन्न हिस्सों से पहुंचा जन ज्वार जीवनदायिनी गंगा, श्यामल यमुना व पौराणिक सरस्वती के पावन संगम में महाकुंभ के प्रथम अमृत स्नान पर्व पर पुण्य की डुबकी लगाने के लिए उमड़ पड़ा। त्रिवेणी संगम में पवित्र डुबकी लगाने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से साधु, अखाडों के संत और आम श्रद्धालु पहुंचे। संगम पहुंचने से पहले ‘अमृत स्नान’ (पवित्र स्नान) के लिए निकले साधुओं के धार्मिक जुलूस के मंगल दृश्यों से पूरा प्रयागराज आलोकित हो उठा। इस मौके पर दुनिया के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भी पवित्र स्नान का पुण्य लाभ लिया। स्नान करने सबसे पहले पहुंचने वाले साधुओं में निरंजनी अखाड़े के नागा साधुओं ने त्रिवेणी संगम पर ‘शाही स्नान’ किया। नागा साधुओं ने भाला, त्रिशूल और तलवारों के साथ अपने शाही स्वरूप में अमृत स्नान किया। ‘अमृत स्नान’ के दौरान ‘किन्नर अखाड़ा’ के सदस्यों ने भी पवित्र स्नान का पु्ण्य लाभ लिया। करोड़ों श्रद्धालुओं पर हेलिकॉप्टर से पुष्पवर्षा महाकुंभ के पहले अमृत स्नान पर डुबकी लगाने पहुंचे करोड़ों श्रद्धालुओं पर योगी सरकार ने हेलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा कराई। सभी घाटों और अखाड़ों पर स्नान के दौरान गुलाब की पंखुड़ियों की बारिश देख संगम तट पर मौजूद श्रद्धालुओं ने अभिभूत होकर ’जय श्री राम’ और ’हर हर महादेव’ के नारे लगाए। प्रत्येक स्नान पर्व पर लगभग 20 क्विंटल गुलाब की पंखुड़ियों की बारिश करने की तैयारी है। खास बात रही कि स्नान के लिए घाटों की लंबाई अधिक होने के कारण लोगों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।स्व-अनुशासन में रहने वाले नागा साधु अखाड़ों के शीर्ष पदाधिकारियों के आदेशों का पालन करते हुए आगे बढ़े। उन्होंने व्यवहार और प्रदर्शन से संदेश दिया कि महाकुंभ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मनुष्य के आत्मिक व प्राकृतिक मिलन का उत्सव है। संगम में उन्होंने जोश के साथ प्रवेश किया और बर्फ के समान पानी के साथ ऐसे अठखेलियां की जैसे वे गुनगुने पानी में उतरे हों।प्रयागराज में महाकुंभ के दूसरे दिन मकर संक्रांति के पावन अवसर पर मंगलवार को 12 घंटे के ‘अमृत स्नान’ के दौरान 3.5 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने कंपकंपाती ठंड की परवाह न करते हुए त्रिवेणी के तट पर पवित्र डुबकी लगाई। बारिश और घने कोहरे के कारण तापमान में आई गिरावट (न्यूनतम 8 डिग्री) के बावजूद संगम स्नान का उत्साह देखने लायक था। गंगा, यमुना और सरस्वती (अदृश्य) का संगम नागा साधुओं का अद्भुत प्रदर्शन के कारण श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना। इन साधुओं की पारंपरिक व अद्वितीय गतिविधियों ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। अमृत स्नान के लिए ज्यादातर अखाड़ों का नेतृत्व कर रहे इन नागा साधुओं का अनुशासन और पारंपरिक शस्त्र कौशल देखने लायक था। कभी डमरू बजाते हुए तो कभी भाले और तलवार लहराते हुए, इन साधुओं ने युद्ध कला का अद्भुत प्रदर्शन किया। लाठियां, भांजते और अठखेलियां करते हुए ये साधु अपनी परंपरा और जोश का प्रदर्शन कर रहे थे। अखाड़ों की शोभायात्रा में कुछ नागा साधु घोड़े पर सवार थे तो कुछ पैदल चलते हुए अपनी विशिष्ट वेशभूषा और आभूषणों से सजे हुए थे। जटाओं में फूल, फूलों की मालाएं और हवा में त्रिशूल लहराते हुए उन्होंने महाकुंभ की पवित्रता को और भी बढ़ा दिया। महाकुंभ 2025 का यह आयोजन नागा साधुओं की विशिष्ट गतिविधियों के कारण लंबे समय तक याद रखा जाएगा। किन्नर अखाड़े ने समाज कल्याण की कामना कर अमृत स्नान किया। आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी की अगुवाई में किन्नर अखाड़े के सभी सदस्य दोपहर में संगम नोज पहुंचे। अखाड़े की सदस्य राम्या नारायण गिरी ने बताया कि अमृत स्नान के अवसर पर प्रत्येक सदस्य ने भारतवासियों की सुख- समृद्धि और देश के कल्याण की कामना की। किन्नर अखाड़े ने शस्त्रों के साथ अपनी परंपराओं का अद्भुत प्रदर्शन किया।

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