अतिवृष्टि से खेतों में जल भराव होने की स्थिति में किसानों के लिए आवश्यक सलाह
रतलाम- (Ratlam) जिले में विगत एक सप्ताह से हो रही अनवरत बारिश से निचले खेतों में जलभराव की स्थिति निर्मित हो रही है खेतों में जल भराव होने से फसलों के पीली पड़ने एवं जड़ सड़न रोक लगने की आशंका रहती है अतः इस नुकसान से फसलों को बचाने के लिए किसान भाई अपने खेत के पानी का जल निकास करें ताकि फसलों को जल भराव से कोई नुकसान नहीं हो।
बदली युक्त मौसम होने से वर्तमान में कई क्षेत्रों में पीला मोजेक (सफेद मक्खी) अधिकतर पुरानी प्रजातियों जैसे JS-9560, JS-335 में अधिक मात्रा में प्रकोप दिखाई देतो है। सर्वे के दौरान पता चला है कि सोयाबीन की नई प्रजाति RVSM-2011-35, JS-7172, तथा कम अवधि वाली फसले NRC- 150, NRC-165 की स्थिति किसानो के खेतों में अच्छी है जल भराव होने से खेत में जड़ सड़न, फली झुलसा, एन्थ्रोक्नोज तथा सफेद मक्खी से फैलने वाले पीला मोजक असर देखा गया है। विषेशज्ञों ने किसानो को सुझाव दिया है कि जहां खेतों में पानी भर गया है वहां तुरंत जल निकास की व्यवस्था करे जहां बिमारियों का प्रकोप हो रहा है वहा बीटा सायफलाथिन + इमिडाक्लोरोप्रिड + मिली या प्रोपेनोफॉस 500 मिली या लेमडायसायलोथ्रिन. थायोमेथाक्साम 125 मिली/ हेक्टेयर छिड़काव करें।
किसान भाई कीटनाशक दवाई खरीदते समय दुकानदार से पक्का बिल ले तथा दवाई की बोटल पर लिखे गये निर्देशों को पड़कर ही उपयोग करे। खेतों में दवाई छिडकते समय मुंह पर मास्क लगाकर ही छिड़काव करें। किसान भाई अतिवृष्टि से जलभराव होने की स्थिति में फसल खराब होने पर टोल फ्री नंबर 14447 पर कॉल कर जीटी पांईट(ग्राउंड टूथिंग) अनिवार्यतः करवाए।




